Hydrogen Train Update : सोनीपत से जींद के बीच चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल में टेक्नीकल दिक्कतों के कारण देरी हो रही है। पहले यह ट्रायल जनवरी के अंत तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब इसके फरवरी में ही पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन, ट्रैक और हाइड्रोजन प्लांट से जुड़े कई टेक्नीकल टेस्टिंग अभी पूरे होने बाकी हैं।
हाइड्रोजन ट्रेन देश की आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल रेल परियोजनाओं में से एक है। इस कारण रेलवे प्रशासन किसी भी स्तर पर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। ट्रायल से पहले न केवल ट्रैक की मजबूती की जांच की जा रही है, बल्कि ट्रेन की कार्यक्षमता, सुरक्षा उपकरणों और ईंधन प्रणाली को भी अलग-अलग चरणों में परखा जा रहा है।
तकनीकी जांच के दौरान हाइड्रोजन गैस में नमी की समस्या सामने आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि गैस में नमी बनी रहती है तो इससे ट्रेन के इंजन और फ्यूल सेल सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाइड्रोजन प्लांट में विशेष हीटर लगाए जाएंगे, जिससे गैस को पूरी तरह सुखाया जा सके। हीटर लगाने और उनकी टेस्टिंग में अतिरिक्त समय लगेगा, जिससे ट्रायल की समय-सीमा आगे बढ़ गई है।

Hydrogen Train Update : ये है हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमता
हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमता भी इसे खास बनाती है। यह ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन ईंधन में लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। जींद से सोनीपत के बीच की दूरी करीब 90 किलोमीटर है, यानी एक बार ईंधन भरने पर ट्रेन इस रूट पर दोनों ओर का सफर आसानी से कर सकेगी। ट्रेन की अधिकतम गति 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।
ट्रायल प्रक्रिया को दो हिस्सों में पूरा किया जाएगा। पहले स्टेशनरी ट्रायल होगा, जिसमें ट्रेन को एक ही स्थान पर खड़ा रखकर उसके सभी सिस्टम की जांच की जाएगी। इसके बाद रनिंग ट्रायल किया जाएगा, जिसमें ट्रेन को अलग-अलग गति पर चलाकर स्पीड सेंसर, कंट्रोल सिस्टम और सुरक्षा उपकरणों की टेस्टिंग होगी। फिलहाल सोनीपत ट्रैक और हाइड्रोजन ट्रेन दोनों की जांच बाकी है।
Hydrogen Train Update : ट्रैक और ट्रेन की टेस्टिंग में लग सकता है समय
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही हाइड्रोजन ट्रेन को ट्रायल के लिए ट्रैक पर उतारा जाएगा। रेलवे के एसएसई बिजेंद्र कुमार के अनुसार, “ट्रैक और ट्रेन की टेस्टिंग में अभी समय लगेगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।”
कुल मिलाकर, तकनीकी चुनौतियों के चलते हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल अब फरवरी में पूरा होने की संभावना है। हालांकि, इसके सफल होने के बाद हरियाणा को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं में शामिल होने का गौरव मिलेगा और पर्यावरण को भी बड़ा लाभ होगा।

