CTET Update : केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) में बड़ा और एतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। CTET एग्जाम अब मैथिली भाषा में भी आयोजित करवाया जाएगा। अब तक हिंदी, अंग्रेजी के अलावा 20 भाषाओं में CTET का एग्जाम होता था लेकिन मैथिली भाषा को शामिल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाया गया है।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जबकि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने भी बोर्ड की बैठक में इसे स्वीकृत करते हुए केंद्र सरकार को औपचारिक सिफारिश भेज दी है। अब केंद्र सरकार के स्तर से अंतिम प्रक्रिया पूरी होते ही मैथिली भाषा में CTET परीक्षा आयोजित होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
यह उपलब्धि मिथिलांचल के लाखों युवाओं के लिए राहत और सम्मान दोनों लेकर आई है। अब मैथिली भाषी अभ्यर्थी अपनी मातृभाषा में CTET परीक्षा दे सकेंगे, जिससे शिक्षक बनने के अवसर और अधिक सुलभ होंगे। इससे न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में (CTET New language approved) स्थानीय भाषा की भूमिका भी सशक्त होगी।

CTET Update : चार साल की मेहनत लाई रंग
मैथिली को CTET में शामिल कराने के पीछे दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर के चार वर्षों के निरंतर प्रयास अहम रहे हैं। उन्होंने लगातार संसद और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के समक्ष यह मांग उठाई। उनके प्रस्ताव को शिक्षा मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए NCERT को भेजा, जहां से इसे औपचारिक मंजूरी मिली। अब मैथिली CTET में शामिल होने वाली 21वीं भाषा बनने जा रही है।
CTET Update : फिलहाल 20 भाषाओं में हो रही CTET की परीक्षा
वर्तमान में CTET हिंदी और अंग्रेजी सहित कुल 20 भाषाओं में आयोजित की जाती है, जिनमें पंजाबी, संस्कृत, असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, नेपाली, मिजो, गारो, खासी, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, मणिपुरी और तिब्बती शामिल हैं। मैथिली के जुड़ने से यह सूची और समृद्ध होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान की दिशा में एक बड़ा संकेत है। इससे मैथिली भाषा को शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
CTET Update : भोजपुरी भाषा को लेकर भी उठ रहे सवाल
हालांकि, इस बीच भोजपुरी भाषा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में व्यापक रूप से बोली जाने वाली भोजपुरी अभी तक CTET में शामिल नहीं हो सकी है। भोजपुरी साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों का मानना है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए, तो भोजपुरी को भी यह मान्यता मिल सकती है।
फिलहाल मैथिली की यह सफलता क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। इससे उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में अन्य भारतीय भाषाओं को भी राष्ट्रीय परीक्षाओं में उचित स्थान मिलेगा और भाषाई विविधता को और मजबूती मिलेगी।

