Ajit Pawar plane crash : महाराष्ट्र की राजनीति के प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले डिप्टी सीएम अजित पवार को जिस बारामती ने बार-बार जिताया, उसे सत्ता के शिखर पर पहुंचाया, उसी आसमान में अजित पवार का राजनीतिक सफर थम गया और प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया। जी हां, महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। आज यानि 28 जनवरी को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत हो गई।
यह हादसा आज सुबह पुणे जिले के बारामती इलाके में उस समय हुआ, जब उनका विमान लैंडिंग की प्रक्रिया में था। इस दुर्घटना में अजित पवार के साथ तीन अन्य लोगों की भी जान चली गई। घटना के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई है। अधिकारियों के अनुसार, अजीत पवार का विमान जैसे ही बारामती क्षेत्र में उतरने की कोशिश कर रहा था, तभी तकनीकी कारणों से संतुलन बिगड़ गया और रनवे से उतर कर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा इतना भीषण था कि विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

Ajit Pawar : राजनीतिक विरासत लेकिन कड़े फैसलों से मिली पहचान
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति का एक बेहद प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। सत्ता के गलियारों में उन्होंने बीते एक दशक से भी ज्यादा समय तक निर्णायक भूमिका निभाई। राजनीति उन्हें विरासत में जरूर मिली, लेकिन अपनी पहचान उन्होंने कड़े फैसलों और मजबूत पकड़ के दम पर बनाई। सहकारिता आंदोलन से राजनीति में कदम रखने वाले अजित पवार को संगठन और प्रशासन दोनों का गहरा अनुभव था।
Ajit Pawar Birth : अजित पवार कितने साल के थे, कब जन्म हुआ था
22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे थे। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में एंट्री कर ली थी। महज 23 साल की उम्र में वे कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड सदस्य बने। इसके बाद 1991 में वे पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और लंबे समय तक इस पद पर बने रहे।
Ajit Pawar : पहली बार बारामती से सांसद बने, बारामति में ही प्लेन क्रैश
साल 1991 में अजित पवार पहली बार बारामती से सांसद चुने गए। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। 1995 में उन्होंने बारामती विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और इस सीट को अपना मजबूत गढ़ बना लिया। बारामती से वे कुल आठ बार विधायक चुने गए और हर चुनाव में जनता का भरोसा जीतते रहे।

Ajit Pawar : पहली बार 2010 में डिप्टी सीएम बने थे अजित पवार
अजित पवार पहली बार 2010 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री (Diputy CM) बने। इसके बाद वे अलग-अलग सरकारों में कई बार इस पद पर रहे। उनके पास वित्त, सिंचाई और जल संसाधन जैसे अहम विभाग रहे, जिनके जरिए वे राज्य के बजट और बड़ी विकास परियोजनाओं से जुड़े फैसलों में सीधे तौर पर शामिल रहे। सिंचाई योजनाओं को लेकर उनकी भूमिका हमेशा चर्चा में रही।
अपने राजनीतिक जीवन में अजित पवार कई बार सुर्खियों में भी रहे। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से यह स्वीकार किया था कि अगर वे शरद पवार के बेटे होते, तो शायद मुख्यमंत्री बन चुके होते। राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने अपने चाचा से अलग राह चुनी और एनसीपी में विभाजन कर अलग गुट भी बनाया, जिसने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दिया।
Ajit Pawar : छठी बार डिप्टी सीएम की शपथ ली थी
5 दिसंबर 2024 को अजित पवार ने अपने करियर में छठी बार डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। वे पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की सरकारों में उपमुख्यमंत्री रह चुके थे। अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के बीच भी सत्ता में उनकी मौजूदगी उनकी राजनीतिक ताकत को दर्शाती रही। अजित पवार का अचानक इस तरह जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके निधन से न सिर्फ बारामती बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है।

