जींद की CRSU यूनिवर्सिटी को 5 करोड़ रुपए का नोटिस, पंचकूला तलब, देखें पूरा मामला

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Jind CRSU Notice : हरियाणा के जींद की चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से 5 करोड़ रुपए का नोटिस जारी हुआ है। पिछले दिनों इस मामले में पक्ष रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन व निर्माण कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए पंचकूला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था।

बताया जा रहा है कि साल 2024 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीम ने विश्वविद्यालय का दौरा किया था। तब विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी का निर्माण कार्य चल रहा था। सीपीसीबी टीम की जांच में पाया गया कि जो निर्माण कार्य करवाया जा रहा था, उसका डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करवाया गया था। डस्ट पोर्टल दिल्ली-एनसीआर में 500 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण और विध्वंस साइटों के लिए एक अनिवार्य आनलाइन पंजीकरण प्लेटफार्म है।

Jind CRSU Notice : यूनिवर्सिटी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया पंचकूला

जिसमें धूल प्रदूषण को कम करने के लिए धूल नियंत्रण उपायों (जैसे एंटी स्माग गन, ग्रीन नेट) का स्वयं-मूल्यांकन और पखवाड़े (15 दिन) की घोषणा अपलोड करना अनिवार्य होता है। जांच में इसके अलावा भी अन्य खामियां पाई गई थी। जिसको लेकर पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से विश्वविद्यालय को नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने के लिए पंचकूला बुलाया गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जांच में मिली खामियों के हिसाब से जुर्माना राशि का जो आंकलन किया गया, वो करीब पांच करोड़ रुपये बनता है।

हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि ये कोई फाइनल जुर्माना राशि नहीं है। विश्वविद्यालय प्रबंधन और निर्माण कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए पत्र जारी किया गया था। विश्वविद्यालय प्रबंधन और निर्माण कंपनी की तरफ से अपना पक्ष रख दिया गया है। उन्होंने जो दस्तावेज पेश किए हैं, उनका आंकलन करने के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी।

Jind CRSU Notice : विश्वविद्यालय ने अपना पक्ष रख दिया है : रजिस्ट्रार

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा. राजेश बंसल का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जो नोटिस भेजा गया है। उस मामले में विश्वविद्यालय ने अपना पक्ष रख दिया है। शिक्षण संस्थानों में निर्माण कार्यों को लेकर फीस में छूट होती थी। कुछ साल पहले शिक्षण संस्थानों पर नियम लागू हुआ है। इसलिए जो भी अनुमानित जुर्माना राशि है, उसका रिव्यू होगा।

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