Dowry in Marriage: करनाल शादी में दहेज लौटाकर युवक ने पेश की मिसाल, दूर तक चर्चा

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Dowry in Marriage: हरियाणा के करनाल जिले में हुई एक शादी इन दिनों काफी चर्चा में है यहाँ शादी में दहेज़ में दिया जाने वाला सामान वापिस लौटकर एक मिसाल कायम की है। शगुन के तोर पर सिर्फ एक 500 का नोट लेकर ही दूल्हे ने बाकि सब कुछ लोटा दिया। जिसके चलते दोनों परिवारों में गर्व की बात है। इससे समाज में भी बहुत अच्छा सन्देश पंहुचा है। दहेज़ प्रथा को ख़तम करने के लिए यह बहुत ही मजबूत कदम है, जिसके चलते इस शादी की चर्चा दूर दूर तक हो रही है।

5 फरवरी को हुई शादी Dowry in Marriage

यह शादी 5 फरवरी को करनाल जिले के घरोंदा क्षेत्र में हुई है। जिसके चलते दूल्हे ने दहेज़ लेने से साफ इंकार किया है। दूल्हा उत्तरप्रदेश के सहारनपुर से बारात लेकर आया था , दूल्हे का नाम अंकित है जिसने शादी की रसम के दौरान करीब 6 लाख तक की नगदी और कुछ फर्नीचर का सामान वापिस करने की बात कही और सिर्फ 500 का नोट लेकर शादी की रसम पूरी की। बाकि रकम वापिस लोटा दी। इससे समाज में अच्छा बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

दहेज़ प्रथा के विरुद्ध सन्देश

इसी के चलते दूल्हे अंकित नेकहा की शादी 2 व्यक्तियों के बीच और 2 परिवारों के बीच एक पवित्र रिश्ता है। इस रिश्ते में पैसों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने पहले ही कह दी थी की उन्हें किसी भी तरह का दहेज़ नहीं चाहिए। जिसके चलते उसकी इस सोच को उनके परिवार का भी पूरा साथ मिला। लेकिन फिर भी ढुलना की और से जो कुछ भी मिला उसे वापिस करना आसान बात नहीं लेकिन उसने फिर भी ऐसा किया।

दूल्हे ने शादी से पहले ही कर दिया था ऐलान

दुल्हन आरती के पिता के अनुसार, जब रिश्ता तय हुआ था तभी लड़के वालों ने साफ कह दिया था कि वे दहेज नहीं लेंगे। शादी के दिन भी उन्होंने अपनी बात पर कायम रहते हुए यह उदाहरण पेश किया। और नकदी के साथ आया हुआ सारा सामान वापिस कर दिया। Dowry in Marriage जिसके चलते शादी पूर्ण सम्मान के साथ और सादगी से सम्पन हुई। जिसके चलते सभी ने इस बात को सहराया।

बदलती सोच बेहतर बदलाव

जानकारों के मुताबिक दहेज़ की प्रथा अभी भी काफी बुरी है इससे मानसिक दबाव के साथ ही दहेज़ देने वालों को आर्थिक दबाव भी झेलना पड़ता है। ऐसे में बहुत कम लोग खुलकर इस प्रथा के विरुद्ध खड़े होते देखे है। लेकिन यह बदलती सोच काफी बेहतर बदलाव ला सकती है।

दहेज़ प्रथा के खिलाफ होने के लाभ इस तरह के कदम सामाजिक दबाव को कम करते हैं और युवाओं में समानता और सम्मान की भावना बढ़ती है इसके साथ ही परिवारों पर आर्थिक बोझ घटता है , इससे दूल्हे का पारिवारिक और पेशेवर परिचय भी होता है। अंकित पंचकूला में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनके पिता सहारनपुर में फीड सप्लाई का व्यवसाय करते हैं। Dowry in Marriage

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