Toll tax Rule: सरकार और से टोल टैक्स के नए नियमों में फिर से बदलाव किया गया है जो 15 फरवरी से लागु किये जाएगें। इस नए नियम से एक्सप्रेसवे के केवल चालू हिस्से का ही टोल लिया जाएगा। जो एक्सप्रेसवे अभी नहीं बना उसका टोल नहीं लिया जाएगा।
हलाकि अब से पहले पुरे रूट का ही टोल लिया जाता था जिसके चलते आम जनता को ज्यादा टेक्स देना पड़ता था। इस बदलाव से टोल व्यवस्था और भी सुधरेगी और जनता की जेब पर असर भी कम होगा। इससे निजी वाहन और माल ढुलाई के वाहन दोनों को ही फायदा होगा।
15 फरवरी से लागू होगा नया टोल नियम Toll tax Rule

यह टोल टैक्स की सुविधा सरकार द्वारा 2008 में शुरू की गई थी जिसके चलते जो एक्सप्रेसवे पूरा तैयार नहीं उसका भी पूरा टोल वसूला जाए लेकिन अब इस नियम में बदलाव कर दिया गया है। जिसके चलते अब अधूरे प्रोजेक्ट पर पूरा टोल नहीं देना पड़ेगा। टोल की दर भी बने हुए रूट के अनुसार ही तय की जाएगी। सरकार के अनुसार यह बदलाव 15 फरवरी से पूरे देश में लागू कर दिया गया है ताकि लोगों को तुरंत राहत मिल सके। Toll tax Rule
क्यों लिया गया यह फैसला
कुछ समय से ऐसे कई रूट है जो अभी पूर्ण तैयार नहीं हुए लेकिन यात्रियों से इन टोल का टैक्स पूरा लिया जा रहा है। जिसके चलते कई परिवहन सगठनो और लोगों ने सवाल किये। जानकारों के मुताबिक अधूरे रूट का पूरा टोल लेना सही नहीं है। इससे यात्रा का खर्च बढ़ जाता था। जिसके चलते उपभोक्ता हित को देखते हुए यह कदम उठाया गया। इस नए नियम से यात्रियों और ट्रांसपोटर्स को काफी फायदा होगा। Toll tax Rule
नए नियम से ये होंगें लाभ
रोजाना सफर करने वालों का खर्च कम होगा लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक चालकों को राहत मिलेगी माल ढुलाई की लागत घटने से बाजार कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है और टोल वसूली में पारदर्शिता बढ़ेगी। अनुमान है कि जिन मार्गों पर निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, वहां 10 से 25 प्रतिशत तक खर्च कम हो सकता है, हालांकि यह अलग अलग परियोजनाओं पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा Toll tax Rule
आने वाले समय में टोल प्लाजा पर शुल्क तय करने की प्रक्रिया को और तकनीकी बनाया जा सकता है। FASTag डेटा के जरिए दूरी आधारित भुगतान की दिशा में भी काम चल रहा है। Toll tax Rule
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में पूरी तरह दूरी आधारित टोल प्रणाली चलाई जाएगी इसमें डिजिटल ट्रैकिंग और रियल टाइम शुल्क निर्धारण जैसी व्यवस्थाएं लागू हो सकती हैं।यह निर्णय केवल टोल कम करने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर आम आदमी के बजट, ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत और सड़क परियोजनाओं के प्रति लोगों के भरोसे पर पड़ेगा।

