Haryana Bhavantar Yojana: हरियाणा में भावांतर भरपाई योजना से सब्जी किसानों को राहत

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Haryana Bhavantar Yojana: हरियाणा में सरकार ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत की थी जिसके बाद अब इसका दायरा लगातर बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब आलू और फूलगोभी के साथ अब टमाटर, करेला, मिर्च, प्याज, भिंडी, बैंगन, लीची घीया,शिमला मिर्च, और आम जैसी फसलें भी शामिल कर दी गई है।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना आवश्यक होता है। जिसके चलते सरकार ने किसानों को राहत देते हुए अब भौतिक सत्यापन की तिथि भी बढ़ा दी है।

क्या है भावांतर भरपाई योजना Haryana Bhavantar Yojana

Haryana Bhavantar Yojana: Relief to vegetable farmers through Bhavantar Bharpai Yojana in Haryana
Haryana Bhavantar Yojana: Relief to vegetable farmers through Bhavantar Bharpai Yojana in Haryana

भावांतर भरपाई योजना का मुख्या उद्देश्य यह है कि अगर कोई भी फसल का मूल्य मंडी में सरकार द्वारा तय की गई कीमत से कम मिलता है तो जिस मूल्य पर फसल बिकेगी और सरकार द्वारा तय किया गया मूल्य में जितना अंतर होगा वह इस योजना से उस नुकसान की भरपाई की जाएगी। सब्जी के दामों में अक्सर उतराव चढाव देखने को मिलता है जिसके चलते सरकार ने यह बहुत ही अहम योजना चलाई है।

इन फसलों को मिलेगा लाभ

उद्यान विभाग ने हालिया फैसले में कई फसलों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है इसमें मुख्यता टमाटर 500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है और प्याज 650 रुपये प्रति क्विंटल और भिंडी 1050 रुपये प्रति क्विंटल तक तय की गई है इसके अलावा घीया 450 रुपये प्रति क्विंटल और करेला 1350 रुपये प्रति क्विंटल रेट तय किया है मिर्च का रेट 950 रुपये प्रति क्विंटल और शिमला मिर्च 900 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है , बैंगन 500 रुपये प्रति क्विंटल और लीची 2400 रुपये प्रति क्विंटल का रेट तय किया गया है आम 1950 रुपये प्रति क्विंटल है।

सरकार के मुताबिक यदि इन बिक्री मूल्य से कम मंडी में उपज की बिक्री होती है तो पात्र किसानों को इस अंतर् के बीच की राशि दी जाएगी।

पंजीकरण और सत्यापन की समय सीमा

किसानों को हरियाणा उद्यान विभाग द्वारा संचालित मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण कराना होगा। अब से पहले इसकी अंतिम तिथि 16 फरवरी तक और अन्य फसलों के लिए 20 फरवरी तक की गई थी। लेकिन सत्यापन की तिथि अब बढाकर 20 फरवरी कर दी गई है।

क्यों जरूरी है यह कदम

हरियाणा में सब्जी उत्पादन का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। परंतु जब एक साथ अधिक उत्पादन बाजार में आता है तो कीमतें गिर जाती हैं। इससे छोटे और मध्यम किसानों को सीधा नुकसान होता है।

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