Amandeep Malik Judge: हरियाणा का नाम एक बार फिर से यहाँ के युवाओं ने रोशन कर दिया है की इसने आगे कोई बंधा नहीं टिक सकती। जींद जिले के गांव गतौली के रहने वाले अमनदीप ने इस एक बार फिर इतिहास रच दिया है। अमनदीप मालिक गुजरात के न्यायिक सिविल सेवा परीक्षा को अपने पहले ही प्रयास में सफल हो गए है। बता दें कि अमनदीप कि आयु अभी सिर्फ 24 साल है। Amandeep Malik Judge
जिसके चलते उन्होंने इतना बड़ा कारनामा करके दिखा दिया है। यह ऐसी आयु है जब युवा अपने करियर की तलाश कर रहे होते है। इसी के चलते अमनदीप ने ऑल इंडिया में 57वीं रैंक हासिल कर अपनी मेज पर ‘जज’ की नेमप्लेट पक्की कर ली है। जैसे ही सोमवार को वह अपने गांव पहुंचे तो इना ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने इन्हे फूलों से लाद दिया और पूरे गांव में जुलूस निकाला गया।
विरासत में मिली अनुशासन की सीख, पढ़ाई को बनाया हथियार Amandeep Malik Judge

अमनदीप की सफलता के पीछे एक अनुशासित पारिवारिक पृष्ठभूमि का बड़ा हाथ है। उनके परिवार में देश सेवा और शिक्षा की गहरी जड़ें हैं। उनके दादा सूबे सिंह मलिक जहां गांव में जेबीटी अध्यापक के रूप में नई पीढ़ी को संवार चुके हैं, वहीं उनके पिता जोगेंद्र सिंह मलिक और ताऊ आईटीबीपी (ITBP) में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात होकर सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं। अमनदीप की शुरुआती शिक्षा मध्यप्रदेश के शिवपुरी स्थित केंद्रीय विद्यालय में हुई, जिसके बाद उन्होंने विशाखापट्टनम से कानून की डिग्री (LLB) ली। कोर्ट की बारीकियों को समझने की ललक ने उन्हें कानून की पढ़ाई के दौरान ही जज बनने की प्रेरणा दी थी।
मेहनत और ईमानदारी: अमनदीप ने बताया सफलता का फॉर्मूला
सम्मान समारोह के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए अमनदीप ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और अपने दोस्तों को दिया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के दौरान कई बार उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन लक्ष्य के प्रति ईमानदारी आपको भटकने नहीं देती। अमनदीप के मुताबिक, गुजरात न्यायिक सेवा के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया था और उन्हें यकीन था कि मेहनत कभी खाली नहीं जाती। उनकी इस उपलब्धि पर गांव के बुजुर्गों का कहना है कि अमनदीप ने न केवल मलिक परिवार का, बल्कि पूरे जींद जिले का नाम गुजरात की अदालतों तक पहुंचा दिया है। Amandeep Malik Judge
युवाओं के लिए बने रोल मॉडल Amandeep Malik Judge
आज जब अमनदीप अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो वे हरियाणा के उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं जो न्यायिक सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं। गांव के कार्यक्रम में हर किसी की जुबां पर एक ही बात थी कि यदि इरादे फौलादी हों, तो जींद की गलियों से निकलकर गुजरात के न्याय मंदिर तक का सफर तय करना नामुमकिन नहीं है। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अमनदीप की इस कामयाबी को क्षेत्र के लिए गौरवशाली बताया है।

