CET Haryana Group D: हरियाणा सरकार ने ग्रुप D की भर्ती परकारिया में बड़ा बदलाव करते हुए सामाजिक और आर्थिक के आधार पर मिलने वाले अंकों को अब समाप्त किया गया है। जिसके चलते अब उम्मीदवार का चयन पूर्ण रूप से CET स्कोर के आधार पर ही किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से भर्ती अब और भी पारदर्शी और मेरिट के आधार पर करवाई जाएगी। यह निर्णय राज्य सरकार के द्वारा लिया गया है। इससे भविष्य में होने वाली सभी ग्रुप D की भर्ती प्रक्रिया बादल जाएगी।
CET अंकों के आधार पर होगा पूरा चयन CET Haryana Group D

जैसे की पहले भी बताया गया है की अब नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह CET स्कोर के आधार पर ग्रुप D भर्ती में किया जाएगा। पहले सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर कुछ अतिरिक्त अंक दिए जाते थे, जिससे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते थे।
सरकार की और से अब यह बात स्पष्ट कर दी गई है कि अधिकांश पदों पर केवल CET स्कोर ही चयन का आधार होगा। जिन पदों की न्यूनतम योग्यता मैट्रिक से कम है, वे इस नियम से अलग रहेंगे। मेरिट लिस्ट सीधे परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर तैयार होगी। यह बदलाव भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अधिसूचना जारी, नियम तुरंत लागू
इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। यह संशोधन ग्रुप डी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम 2018 की धारा 26 के तहत किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद चयन प्रणाली में दूसरी अनुसूची में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार कुल चयन 100 प्रतिशत CET स्कोर पर आधारित रहेगा।
परीक्षा पैटर्न में क्या रहेगा खास
ग्रुप डी CET परीक्षा का स्तर दसवीं कक्षा के अनुरूप रखा गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार इसमें शामिल हो सकें। परीक्षा को दो भागों में बांटा गया है।
पहला भाग में 75 प्रतिशत अंक होंगें इसमें सामान्य ज्ञान के साथ तर्कशक्ति और गणितीय योग्यता एवं अंग्रेजी और हिंदी संबंधित विषय होंगें जबकि दूसरा भाग में 25 प्रतिशत अंक रखे गए है जिसमे हरियाणा का इतिहास और संस्कृति और साहित्य एवं भूगोल और पर्यावरण के अलावा समसामयिक घटनाएं भी शामिल की गई है। इससे स्थानीय ज्ञान और सामान्य क्षमता दोनों का संतुलित मूल्यांकन होगा।
पहले कैसे होता था चयन
पिछले कुछ वर्षों में ग्रुप डी भर्ती में सामाजिक आर्थिक मानदंड के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए जाते थे। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अवसर देना था। हालांकि समय के साथ कई उम्मीदवारों और विशेषज्ञों ने कहा कि इससे मेरिट सूची प्रभावित होती है। अब सरकार ने इन अतिरिक्त अंकों को हटाकर पूरी प्रक्रिया को एक समान मानदंड पर आधारित कर दिया है।

