May 15, 2024
11 11 11 AM
आदमपुर में विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने किया प्रदशज़्न, सौंपा ज्ञापन
कपास मंडी से करोड़ों रुपए लेकर फरार फर्म के मालिकों की मुश्किलें बढ़ी, अनाज मंडी की 4 फर्मों ने दर्ज करवाएं अपने बयान
पाइप लाइन डालने की जगह बरसाती नाला बनाने पर लोगों ने बैठक कर जताया विरोध
मियावाकी पद्धति से लगाए गए वन से बनेगा राजकीय बहुतकनीकी का प्रांगण हरा भरा: डॉ. कुलवीर सिंह
N.S.S इकाई द्वारा छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई की जागरूकता हेतू लगाया सेमिनार
पुलिस ने अलग-अलग जगहो से शराब तस्करों से 27 बोतल शराब पकड़ी
लड़की पैदा होने पर आयोजित किया ग्रामीण भोज, त्रिवेणी लगाकर किया कुआं पूजन
खेत में काम कर रहे व्यक्ति पर किया हमला, 2 नामजद सहित 5 पर मामला दर्ज
खाना खाकर सोया था परिवार, उठा तो गायब मिली पत्नी
तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराकर पलटा खाकर पानी की डिग्गी में गिरी, चालक की मौत
Latest Post
आदमपुर में विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने किया प्रदशज़्न, सौंपा ज्ञापन कपास मंडी से करोड़ों रुपए लेकर फरार फर्म के मालिकों की मुश्किलें बढ़ी, अनाज मंडी की 4 फर्मों ने दर्ज करवाएं अपने बयान पाइप लाइन डालने की जगह बरसाती नाला बनाने पर लोगों ने बैठक कर जताया विरोध मियावाकी पद्धति से लगाए गए वन से बनेगा राजकीय बहुतकनीकी का प्रांगण हरा भरा: डॉ. कुलवीर सिंह N.S.S इकाई द्वारा छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई की जागरूकता हेतू लगाया सेमिनार पुलिस ने अलग-अलग जगहो से शराब तस्करों से 27 बोतल शराब पकड़ी लड़की पैदा होने पर आयोजित किया ग्रामीण भोज, त्रिवेणी लगाकर किया कुआं पूजन खेत में काम कर रहे व्यक्ति पर किया हमला, 2 नामजद सहित 5 पर मामला दर्ज खाना खाकर सोया था परिवार, उठा तो गायब मिली पत्नी तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराकर पलटा खाकर पानी की डिग्गी में गिरी, चालक की मौत
मै आदमपुर हूं और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हूं

मै आदमपुर हूं और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हूं

मै आदमपुर हूं और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हूं


-सरकारें बदली पर नहीं बदली आदमपुर की तकदीर औश्र तस्वीर
-ना धनी ना धौरी..आदमपुर की जनता सुबक-सुबक के रो रही

एकता क्रांति मंडी आदमपुर

एक वो जमाना था जब मेरी चौधर का डंका प्रदेश में ही नहीं पूरे भारत वर्ष में बोलता था। उस समय मैं पूरे ठाठ-बाठ से रहता था। मुझे उस समय किसी चीज की कमी नहीं थी।

मैं एक चीज मांगता तो हजारों मिलती थी। लेकिन जैसे ही मेरी बागडोर दूसरी पीढ़ी के हाथ में आई मेरी खुशहाली को पता नहीं किसकी नजर लग गई।

मेरे वारिश एक के बाद एक गलत फैसले लेते रहें और मैं बदहाली के ऐसे भंवर में फसता चला गया कि दोबारा उस बदहाली के भंवर से निकल ही नहीं पाया।

अब मुझे किसी तारणहार का इंतजार है ताकि वो मुझे इस मेरी बदहाली से बाहर निकाले और मैं भी आराम की जिंदगी जी सकू।

जी हां, हम बात कर रहे आदमपुर हलके की, जो किसी समय में मिनी चंडीगढ़ कहलाता था। प्रदेश की सरकार आदमपुर से चलती थी लेकिन आज आदमपुर का कोई धनी-धौरी नहीं है।

आज आदमपुर की हालत बद् से बद्तर हो चुकी है।

आदमपुर हलके के गांवों के सभी रोड टूट चुके हैं। सड़कों पर हर जगह गढ्ढ़ों का सम्राज्य फैल चुका है। आदमपुर शहर की बात करें तो यहां की करीब-करीब सभी सड़कें दम तोड़ चुकी हैं।

आदमपुर शहर में प्रवेश करने के लिए कोई रस्ता ऐसा नहीं बचा है जो बिना गढ्ढ़ों के शहर में प्रवेश करवा दे।

—सीवरेज व्यवस्था का निकला जनाजा, लोग पी रहे हैं गंदा पानी
मंडी आदमुपर की सीवरेज व्यवस्था का जनाजा निकाला हुआ है।

सड़को पर सीवरेज का पानी बह रहा हैं जिसके कारण पूरे दिन सड़ाध रहती हैं। इसके अलावा पीने के पानी में सीवरेज का मिक्स पानी सप्लाई हो रहा है। पीने के पानी की हालत तो यह है कि इस पानी से नहाने पर भी सिर के बाल उड़ रहे है। बहुत-से लोगों को एलर्जी हो रही है और वे पूरे दिन खुजाते रहते हैं।

सिवरेज का पानी पेयजल में मिक्स होने के कारण लोगों का स्वास्थ बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। एक-एक बूंद पानी की बचाने की अपील करने वाले जनस्वास्थ विभाग के कर्मचारी भी अब दबे स्वर में लोगों को सलाह दे रहे है कि सप्लाई आने पर 10-15 मिनट पानी को चलने दे।

गांव मोहब्बतपुर से विवाहिता लापता, पति ने जताया शक

इसके बाद ही इसे टंकी में भरे। पेयजल की इस समस्या को लेकर आदमपुर के लोग सीएम से लेकर प्रत्येक नेता के आगे गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा है।

—-वहीं बरसाती पानी निकासी न होने से दुकानदार, गृहस्थ से लेकर बच्चे तक परेशान हैं
मंडी आदमपुर में पानी निकासी का प्रंबध न होने के कारण सड़के झील में तबदील हो जाती हैं आदमपुर शहर में जरा-सी बरसात आने पर पूरा आदमपुर तलाब में तबदील हो जाता है।

गंदा पानी घरों में घुसने लगता है। सिवरेज बैक मारने लगते है, इससे पूरे घर में गंदगी का सम्राज्य फैल जाता है। बरसात आने पर आदमपुर शहर में कोई ऐसा रास्ता नहीं बचता जिससे होकर बच्चे स्कूल जा पाएं।

क्रांति चौक, अनाज मंडी, आदमपुर गांव चौक, कॉलेज रोड, टेलीफोन एक्सचेंज रोड, बस स्टैंड रोड, खैरमपुर रोड चौक पर 1 से 2 फीट तक पानी खड़ा हो जाता है।

ऐसे में आमजन काफी बेबस नजर आता है। बारिश आते ही आदमपुर की दुकानों पर सन्नाटा छा जाता है। क्रांति चौक पर तो हालत ये है कि बारिश आने पर 3 से 4 दिन तक दुकानें बंद रहती है।

—-आदमपुर शहर में पार्को की हालात दयनीय
यहां पर सरकार का कोई भी पार्क ऐसा नहीं है जहां बच्चे खेल सके। हुड्डा पार्क का एक हिस्सा ठीक-ठाक हुआ है वो भी संघ के स्वयंसेवकों की मेहनत से। सरकार ने इसके रखरखाव को ठेके पर दे रखा है लेकिन सच्चाई ये है कि यदि इस पार्क में संघ की शाखा न लगे तो यहां पर घास तक देखने को ना मिले। इसके अलावा शांति पार्क तथा शिव कलोनी का फुसाराम पार्क लोगों के द्वारा विकसीत किए गए है और इनकी देखरेख भी यहां के लोग ही करते हैं।

चौ.भजनलाल के शासन काल में विकसीत हुआ जलघर का पार्क आज खंडहर हो चुका है। यहां के फव्वारें दशको पहले दम तोड़ चुके हैं और घास की जगह यहां खरपतवार उगी हुई है।

रेलवे की जमीन पर बने इंदिरा गांधी पार्क स्थानीय विधायक के निवास के एकदम पीछे है। इस पार्क में घास तो दूर चारदिवारी तक ढ़ंग की नहीं बची है।

गंदगी और खरपतवार के चलते लोग इस पार्क का नाम तक भूल गए है।

—बदहाली के कारण काम न होने से व्यापारी कर रहे पलायन
अनाज मंडी में पिछले कुछ सालों में बहुत से व्यापारी आदमपुर की बदहाली के कारण काम न चलने से आर्थिक मंदी के शिकार हो गए जिसके कारण वे आर्थिक फ्रॉड करके फरार हो गए। आढ़तियों और किसानों के करोड़ों रुपये डूब गए।

लेकिन आदमपुर में अब कोई पंचायती ऐसा नहीं बचा है जो उन व्यापारियों से पैसा वापिस दिलवा सके। एक जमाना था कि आदमपुर में चौ. भजनलाल के बिजनेस पाटर्नर रहे चौ. पोकरमल व उनकी दुकान के मुनिम हरिसिंह राव कभी आढ़ती या किसानों का पैसा नहीं डूबने देते थे।

उन्होंने कभी किसी व्यापारी को आदमपुर से आर्थिक फ्रॉड करके भागने नहीं दिया। अब लगातार आदमपुर की अनाज मंडी में आर्थिक फ्रॉड हो रहे है, लेकिन अब कोई चौधरी आगे आकर आढ़तियों की सूद नहीं ले रहा।

हालात ये हो गई कि अब आदमपुर के आढ़तियों ने अपना काम धीरे-धीरे समेटना आरंभ कर दिया है। पुराने आढ़ती अब अपनी नई पीढ़ी को आढ़त के काम में लेकर नहीं आ रही। वे नई पीढ़ी को आदमपुर से बाहर शिफ्ट करने में लगे हुए है।

–सही नेतृत्व न मिलने के कारण आदमपुर भौतिक, मौलिक और आर्थिक रूप से कमजोर हुआ
सही नेतृत्व न मिलने के कारण आदमपुर भौतिक, मौलिक और आर्थिक रूप से कमजोर हुआ होता जा रहा है।

काम-धंधे चौपट होते जा रहे हैं। पिछले 10 सालों में आदमपुर में कोई बड़ी फैक्टरी नहीं लगी है। जो पुरानी फैक्टरियां चल रही है वे भी अधिकतर ठेके पर दी जाने लगी है। नया रोजगार दिन-प्रतिदिन यहां समाप्त होता जा रहा है।

ऐसे में यहा के लड़कों के रिश्ते तक में अब दिक्कत आने लगी है। मजबूरी में लोग अब आदमपुर से पलायन करने लगे हैं। इतना कुछ होने के बाद भी यहां से प्रतिनिधित्व करने वाले व सरकार के नुमाइंदे खामोश बैठे हैं।

अब आदमपुर के लोगों को किसी तारणहार की की इंतजार हैं जो उनको इस बदहाली के बंवडर से बाहर निकाल सके।

एकता क्रांति एक सोशल न्यूज़ प्लैटफ़ॉर्म है । कोई भी खबर या सूचना भेजने के लिए संपर्क करें 9306813001

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *