Haryana Rajya Sabha election: हरियाणा विधानसभा में राजयसभा चुनाव के समय बड़ा विवाद खड़ा तब हुआ जब टोहाना के विधयक परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया गया। जिसके चलते गोपनीयता उलंगन के मामले में जाँच के बाद ही यह फैसला लिया गया जिसके चलते इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया को काफी प्रभावित किया। जिसके चलते राज्य की राजनीती में काफी हलचल पैदा हो गई।
गोपनीयता विवाद से रुकी मतगणना Haryana Rajya Sabha election

राज्यसभा में चुनाव की गिनती प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मतदान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए जिसके चलते यह आरोप लगाया गया कि विधयकों ने वोटिंग के दौरान नियमों का सही से पालन नहीं किया गया। जिसके चलते आयोग ने इस मामले को घंभीता से लेते हुए इस बारे में जाँच शुरू कर दी जिसके चलते परमवीर सिंह कि वोट को रद्द कर दिया गया। जिसके चलते वोटिंग की गिनती कई घटें तक रोक दी गई। Haryana Rajya Sabha election
अन्य वोटों पर भी उठे सवाल
यह विवाद केवल एक वोटर के लिए ही नहीं था बल्कि अन्य वोटर्स के लिए भी बना हुआ था जिसके चलते कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल और वरिष्ठ मंत्री अनिल विज के वोट पर भी आपत्ति दर्ज करवाई गई थी हालाँकि इसे जाँच के बाद वेध ही घोषित कर दिया गया। जिससे स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई।
आंकड़ों का समीकरण और बढ़ा तनाव
90 सदस्यीय विधानसभा में इस बार 88 विधायकों ने मतदान किया। इनेलो के दो विधायकों ने प्रक्रिया से दूरी बनाई। जिसके चलते सामान्य परिस्थितियों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास एक एक सीट जीतने का गणित था। लेकिन ऐसे ही एक वोट रद्द होने के चलते क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई इन सबने मुकाबले को अप्रत्याशित बना दिया। इसी के चलते निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए थे, क्योंकि वोटों में मामूली बदलाव से समीकरण बदल सकता था। Haryana Rajya Sabha election
कौन हैं परमवीर सिंह
परमवीर सिंह हरियाणा की राजनीति में एक जाना पहचाना नाम हैं। जो अभी टोहाना से 3 बार विधायक बन चुके है वह 2005 में पहली बार विधानसभा पहुंचे थे जिसके चलते 2009 में उन्होंने मंत्री पद संभाला फिर अब 2024 में चुनाव जीतकर फिर से वापसी की है। उनका राजनीतिक परिवार भी मजबूत रहा है। उनके पिता हरपाल सिंह पांच बार विधायक रह चुके हैं। Haryana Rajya Sabha election
गुटबाजी का भी दिखा असर
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, परमवीर सिंह का नाम हाल के दिनों में कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों के कारण भी चर्चा में रहा है। जिसके चलते पहले वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाते थे, लेकिन अब उन्हें कुमारी सैलजा के खेमे के साथ जुड़ा माना जा रहा है। इस बदलाव को पार्टी के भीतर चल रही रणनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

