Haryana Ration Depot: हरियाणा में सरकार की और से राशन वितरण प्रक्रिया में लगातार सुधर करते हुए नए नियम लागु किये जा रहे है। जिसके चलते राशन वितरण प्रकारिया में पारदर्शिता लाइ जा सकें। अब इसके लिए आधुनिक विकल्प चुनकर प्रदेश के करीब 9 हज़ार से भी ज्यादा राशन डिपो अब पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखने का फैसला किया गया है।
इस योजना का सीधा मकसद उन शिकायतों को खत्म करना है जिनमें लाभार्थियों को कम राशन देने या स्टॉक में हेराफेरी की बातें सामने आती रही हैं।
पंचकूला के सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में उतारने की तैयारी Haryana Ration Depot

जानकारी के लिए बता दें कि यह मॉडल का परीक्षण पहले पंचकूला में किया गया था जो करीब 45 दिनों तक चला यह 45 दिन के सफल परिक्षण के बाद ही सामने आया कि इस दौरान न केवल वितरण प्रक्रिया में सुधार हुआ, बल्कि रिकॉर्ड के रखरखाव में भी पारदर्शिता आई। इस सफल प्रयोग के बाद अब विभाग ने इसे पूरे राज्य में लागू करने का फैसला लिया है। Haryana Ration Depot
विभाग के सूत्रों के अनुसार इस पूरी परियोजना पर 150 से 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अप्रैल महीने में इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और उम्मीद है कि आगामी तीन महीनों के भीतर हरियाणा के हर गली-मोहल्ले में स्थित सरकारी राशन की दुकान कैमरों से लैस हो जाएगी। Haryana Ration Depot
कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?
सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक डिपो पर दो कैमरे लगाए जाएंगे जो अलग-अलग कोणों से निगरानी करेंगे इसमें पहला कैमरा यह वितरण स्थल पर लगाया जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि राशन लेने आए व्यक्ति को सही मात्रा में अनाज मिल रहा है या नहीं। जबकि दूसरा कैमरा इसे गोदाम या स्टॉक रूम में लगाया जाएगा ताकि यह पता चल सकें कि सरकारी गोदामों से आया अनाज सुरक्षित है और उसमें कोई अवैध निकासी नहीं हो रही है। Haryana Ration Depot
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कैमरों का सीधा कंट्रोल रूम चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में होगा। यानी मुख्यालय में बैठा अधिकारी किसी भी समय किसी भी डिपो की लाइव फीड देख सकेगा।
डेढ़ करोड़ लाभार्थियों पर सीधा असर Haryana Ration Depot
हरियाणा में वर्तमान में लगभग 39 लाख राशन कार्ड धारक हैं, जिनसे करीब डेढ़ करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी आबादी को राशन बाँटने की प्रक्रिया में अक्सर घपले की खबरें आती रहती थीं। राज्य मंत्री राजेश नागर ने इस बारे में स्पष्ट किया है कि सरकार का लक्ष्य कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को उसके हक का पूरा दाना पहुँचाना है।

