Haryana women scheme: हरियाणा सरकार की और से अनुसूचित जाति की युवतियों के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। युवतियों को रोजगार देने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है जिसके चलते अब हर जिले में करीब 30 युवतियों का चयन करके इलेक्ट्रिक स्कूटी दी जाएगी।
इसके अलावा इन युवतियों को करीब 6 माह तक करीब १२ से 14 हज़ार रुपये मानदेय भी हर महीने दिया जाएगा। इस योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है जिसे अब जल्द ही हर जिले में लागु किया जाएगा। Haryana women scheme
योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि Haryana women scheme

हरियाणा में महिलाओं की श्रम में भगीदारी राष्ट्र के हिसाब से काफी कम है जिसके चलते सरकार की और से इस डिजिटल प्लेटफार्म के आधार पर रोजगार देने की तैयारी की जा रही है। जानकारों के मुताबिक देश में इस प्रकार की सेवाओं का बाजार लगतार बढ़ ही रहा है। जिसके चलते अब युवतियों को भी इस प्रशिक्षित करके बदलाव लाया जा सकता है। Haryana women scheme
कैसे काम करेगी यह योजना
इस योजना के तहत चयनित युवतियां मोबाइल ऐप के माध्यम से ही छोटी दुरी की यात्रा करेंगी। सरकार इस योजना के लिए किसी निजी कम्पनी से समझौता करेगी जो युवतियों को स्कूटी और डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगी। जिससे युवतिया सामान की डिलवरी जैसे कार्य करेंगी।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
इस योजना में आवेदन करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी रखी गई है इसमें आवेदक महिला SC या BC वर्ग से हो और महिला के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होना चाहिए और जिले की निवासी हो और साथ ही बुनियादी डिजिटल समझ हो जिसके चलते चयन के बाद युवतियों को ट्रैफिक नियम, ग्राहक सेवा और सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। Haryana women scheme
आय और लक्ष्य आधारित संचालन
इस योजना के तहत हर दिन करीब 15 राइड करनी होंगी। जिसके चलते 6 महीने तक मानदेय भी दिया जाएगा। यदि वे सेवा जारी रखना चाहें तो इलेक्ट्रिक स्कूटी उनके पास ही रहेगी, जिससे उन्हें लंबे समय तक आय का स्रोत मिल सके। यदि एक युवती औसतन 15 से 20 राइड प्रतिदिन पूरी करती है तो वह मानदेय के अतिरिक्त भी कमाई कर सकती है।
शहरों में सस्ती यात्रा का नया विकल्प
इस नई योजन से आम लोगो को भी काफी फायदा होने वाला है इससे कम दुरी की यात्रा के लिए सस्ती राइड भी सभी को मिलेगी। जिसके चलते निजी वाहनों पर भी निर्भरता कम होगी। जिसके चलते ट्रैफिक भी घटेगी। इससे पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा। छोटे शहरों में इस तरह की सेवा से रोजगार और गतिशीलता दोनों बढ़ेंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है तो इसे अन्य जिलों और राज्यों में भी दोहराया जा सकता है।

