LPG Gas price: नई दिल्ली: मार्च के महीने की शुरुआत के साथ ही गैस की कीमतों में भी बढ़ाव मिला है। दिल्ली , कोलकाता और मुंबई के अलावा चेनई के भी कई शहरों में 19 किलो वाले सिलेंडर के डैम में करीब 28 रुपये से 31 रुपये तक की वृद्धि हुई है। हालाकिं घरेलू सिलेंडर की कीमत में अभी कोई बदलाव नहीं है। इसी के चलते होटल और रेस्टोरेंट में लागत पहले से ज्यादा बढ़ गई है।LPG Gas price
प्रमुख शहरों में नई कीमतें LPG Gas price

कंपनीयो की और से दोबारा नए प्राइस लागु किये गए है जिसके चलते अब दिल्ली में 19 किलोग्राम सिलेंडर अब 1768.50 रुपये तक पहुंच गई है जबकि मुंबई में नई कीमत 1720 रुपये हो गई है। वही कोलकाता में दर 1875.50 रुपये तक है। चेन्नई में कीमत 1929 रुपये हो गई है जबकि दिल्ली में अब से पहले सिलेंडर की कीमत 1740 रुपये ही थी और मुंबई में सिलेंडर की कीमत में करीब 28 रुपये की वृदि हुई है।
घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत
हालंकि अभी तक घरेलू सिलेंडर 14.2 किलोग्राम की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत 853 रुपये बनी हुई है। LPG Gas price
क्यों बढ़े दाम
LPG गैस के रेट बाजार में अंतराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत और डॉलर में उतराव चढ़ाव के कारण प्रभावित हुई है। बता दें कि अभी हाल ही में वैश्विक बाजार में भी काफी उतराव चढ़ाव देखने को मिला है जिसके चलते कीमतों में बदलाव देखने को मिला है।
एक ऊर्जा विशेषज्ञ के अनुसार, कमर्शियल गैस सिलेंडर कीमतों में संशोधन आम तौर पर महीने की पहली तारीख को किया जाता है। यह प्रक्रिया पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली के तहत होती है। इससे होटल और रेस्टोरेंट पर असर देखने को मिलता है क्योंकि कमर्शियल गैस सिलेंडर का सबसे अधिक उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग सेवाओं में होता है। लागत बढ़ने से खाने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि तुरंत मेनू दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन लगातार वृद्धि होने पर समायोजन संभव है।
मार्च में बढ़ोतरी का ट्रेंड LPG Gas price
पिछले कई वर्षों में मार्च की शुरुआत में कमर्शियल गैस सिलेंडर कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। ऊर्जा बाजार विश्लेषण से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष के अंत और वैश्विक मूल्य समायोजन के कारण यह पैटर्न बना रहता है। त्योहार के समय यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव डाल सकती है, खासकर तब जब पहले से पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हों।

