Mustard Price Haryana: हरियाणा की अनाज मंडियों में आज से सरसों की खरीद MSP पर शुरू होनी है लेकिन इस बार की स्तिथि कुछ अलग ही नज़र आ रही है जिसके चलते इस बार सरकारी खरीद की राह इतनी आसान नहीं है क्योंकि सरसों के भाव में इस बार जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। Mustard Price Haryana
जिसके चलते निजी कंपनी को सरसो बेचने पर किसानो को ज्यादा मुनाफा हो रहा है। दूसरी और गेहू की खरीद से पहले भी कई व्यवस्थाओं में अभी भी असामजस्य की स्तिथि बानी हुई है।
सरसों में निजी खरीदार हावी MSP से ऊपर मिल रहे भाव Mustard Price Haryana

जैसे की पहले भी बताया गया है कि इस साल सरसों के किसानों के चेहरे पर चमक है, लेकिन इसकी वजह सरकारी खरीद नहीं बल्कि बाजार की तेजी है। प्रदेश में सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जबकि फतेहाबाद, कैथल और भिवानी जैसी मंडियों में प्राइवेट खरीदार 6500 से 7000 रुपये तक की बोली लगा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो सरकारी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसर सकता है। किसान सरकारी एजेंसियों के चक्कर काटने और नमी के कड़े मानकों (8%) में उलझने के बजाय नकद और ऊंचे भाव पर निजी व्यापारियों को फसल बेचना बेहतर समझ रहे हैं।
मंडियों की हालत Mustard Price Haryana
वही प्रदेश की मंडियों की बात करें तो यहाँ दावे तो हाई-टेक व्यवस्था के किए जा रहे हैं लेकिन ग्राउंड जीरो पर स्थितियां चिंताजनक हैं। करनाल, कैथल और यमुनानगर जैसी बड़ी मंडियों में सड़कें टूटी हुई हैं और सफाई व्यवस्था दम तोड़ रही है। इसके अलावा कई स्थानों पर उठान का संकट भी है। जिससे मंडियों में जाम की स्थिति पैदा हो जाएगी। गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी है, लेकिन कई केंद्रों पर अब तक पर्याप्त बारदाना नहीं पहुँचा है।
बायोमेट्रिक और नए नियमों पर तकरार
इस बार सरकार ने पारदर्शिता के नाम पर कई नई गाइडलाइंस थोपी हैं, जिनका आढ़ती और किसान संगठन पुरजोर विरोध कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक मंडी में प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। और ट्रैक्टर-ट्रॉली की नंबर प्लेट और फोटो ई-खरीद पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। Mustard Price Haryana
जियो-फेंसिंग के जरिए सुनिश्चित किया जाएगा कि गेट पास मंडी परिसर के अंदर ही कटे। आढ़ती संघों का तर्क है कि पीक सीजन में जब हजारों ट्रॉली एक साथ आती हैं, तब बायोमेट्रिक और फोटो जैसे नियमों से भारी जाम लगेगा और प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।
नमी पर तकरार
मौसम में आए बदलाव के कारण फसल में नमी की मात्रा मानकों से अधिक दर्ज की जा रही है। सरकारी एजेंसियां 12% से अधिक नमी वाला गेहूं लेने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में किसान असमंजस में हैं।

