Delhi Karnal Corridor : दिल्ली से करनाल का घंटों का सफर मिनटों में, जानें क्या है सरकार का मास्टर प्लान

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Delhi Karnal Corridor : यदि आप दिल्ली-एनसीआर में जॉब करते हैं और करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र के आसपास रहते हैं। सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है कि नौकरी पर जाने और आने में लगने वाला घंटों का सफर अब मिनटों में रह जाएगा। इसमें आप मुरथल के परांठे भी खा सकते हैं।

दरअसल नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने दो नए नमो भारत RRTS कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की है, जो दिल्ली-हरियाणा के ट्रैफिक पैटर्न को पूरी तरह चेंज होने जा रही है। अहम चर्चा यह है कि पहले कॉरिडोर के स्टार्ट होने के पश्चात सराय काले खां से करनाल की यात्रा केवल 1.30 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जबकि कश्मीरी गेट से मुरथल मात्र 30 मिनट दूर होगा।

यह कॉरिडोर कुल 136 किमी लंबा होगा, जिसमें दिल्ली का 36 किमी और हरियाणा का 100 किमी भाग सम्मिलित है। इस रूट पर टोटल 17 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिसमें से दिल्ली में 6 और हरियाणा में 11, मुरथल और गंजबार में दो डिपो भी प्रस्तावित हैं।

Delhi Karnal Corridor : औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्रों को मिलेगी गति

इस रूट पर सोनीपत एजुकेशन सिटी, कुंडली, बरही इंडस्ट्रियल एरिया, पानीपत, IOCL रिफाइनरी और करनाल जैसे बड़े औद्योगिक और शिक्षा केंद्र आते हैं। यहां हर दिन लाखों यात्री यात्रा करते हैं, जिससे जाम और प्रदूषण की परेशानी बनी रहती है। नमो भारत ट्रेन (Namo Bharat Train) औसतन 90 किमी प्रति घंटे की गति से चलेगी, जिससे सफर के टाइम में भारी कटौती आएगी।

Delhi Karnal Corridor Hours-long journey from Delhi to Karnal in minutes, know what is the government's master plan
Delhi Karnal Corridor

Delhi Karnal Corridor : दिल्ली से बावल एक घंटे में होगा सफर

रेलवे विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दूसरा RRTS कॉरिडोर 92 किमी लंबा होगा, जो दिल्ली, गुरुग्राम, मानेसर, MBIR और बावल को लिंक करेगा। यह कॉरिडोर दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport corridor) को भी RRTS नेटवर्क से जोड़ेगा। इसका संचालन होने के पश्चात दिल्ली से बावल की यात्रा मात्र एक घंटे में पूरा हो सकेगा, जिससे NCR की प्रोडक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

Delhi Karnal Corridor : सड़कों से लाखों वाहनों से मिलेगी राहत

NCRTC के अनुसार, इन दोनों प्रोजेक्ट्स के आरंभ होने पर हर दिन लगभग 2 लाख प्राइवेट वाहन सड़कों से हट जाएंगे यानि उनसे राहत मिलेगी। ऐसा में इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, प्रदूषण घटेगा और हर वर्ष लगभग ढाई लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। बता दें कि स्टील-टू-स्टील तकनीक वाली नमो भारत ट्रेन (Namo Bharat Train) सड़क परिवहन के मुकाबले में मात्र पांचवां पार्ट फॉसिल फ्यूल व्यय करती है।

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