Jind Mausam ka hal : हरियाणा समेत उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। 30 जनवरी तक बारिश की संभावना है। ऐसे में जींद में भी 22 जनवरी और 25 जनवरी को बारिश के आसार बन रहे हैं। आगामी दिनों में जींद में मौसम का हाल (jind mausam ki jankari) क्या रहेगा, आइए बताते हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जनवरी महीने के बीच में ही इस तरह तापमान बढ़ना फसलों के लिए ठीक नहीं है। यदि ऐसे ही तापमान बढ़ता रहा तो गेहूं व सरसों की फसल में चेपा रोग, पीला रतुआ, सफेद तना गलन जैसे रोग हो सकते हैं। ऐसे में जनवरी महीने में ही तापमान बढ़ने से किसान चिंतित हैं। सोमवार को अधिकतम तापमान 22.2 व न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोकि सामान्य से अधिक है।
इससे पहले सोमवार को हवा की गति चार किलोमीटर प्रति घंटा रही, वहीं हवा में नमी की मात्रा 50 प्रतिशत रही। शुक्रवार को बारिश की संभावना बताई जा रही है। यदि जनवरी महीने में बारिश होती है तो यह फसलों के लिए काफी लाभदायक होगा और तापमान में भी कुछ संतुलन (jind mausam purvanuman) बनेगा। पिछले चार दिन से लगातार तापमान बढ़ रहा है। चार दिन पहले न्यूनतम तापमान चार डिग्री तथा अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस था।

Jind Mausam update : ठंड के मौसम में नहीं हुई बारिश
मौसम विभाग (jind mausam vibhag) के अनुसार इस समय आसमान में बादल भी छाए रहते हैं, लेकिन पूरे ठंड के मौसम में बारिश नहीं हुई है। इस समय फसलों के लिए बारिश की जरूरत है। कृषि विशेषज्ञ डा. सुभाषचंद्र ने बताया कि यदि इसी गति से तापमान बढ़ता रहा तो यह गेहूं व सरसों की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। तापमान बढ़ने से फसलों चेपा रोग, पीला रतुआ, सफेद तना गलन जैसे रोग हो सकते हैं। इससे फसलों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जनवरी महीने में ठंड की जरूरत है। यदि बारिश हो जाए तो सोने पर सुहागा हो जाएगा। इस समय गेहूं की फसल फुटाव पर है।
Jind Mausam yellow rust aphid disease : लक्षण और उपचार के तरीके
चेपा रोग : डा. सुभाषचंद्र ने बताया कि चेपा रोग एक कीट-जनित समस्या है, जो सरसों, गेहूं, जौ, आलू और आम जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाता है। यह पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है। इससे फसल का उत्पादन प्रभावित होता है। इसके लिए कान्फिडोर, डाइमेथोएट का छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से जो लोग खेती करते हैं वह पांच किलोग्राम नीम की पत्तियां या पांच किलोग्राम नीम की निमोली लें। इनको कूटकर पांच लीटर गोमुत्र तथा 100 लीटर पानी में घोलकर इसका छिड़काव करें।
yellow rust : पीला रतुआ कैसे रोकें
यह गेहूं की एक प्रमुख और विनाशकारी फंगल बीमारी है। इसमें गेहूं की पत्तियों पर पीले-नारंगी रंग की धारियां बन जाती है। इससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता (yellow rust) कम हो जाती है। ठंडे और नम मौसम में तेजी से फैलता है। प्रोपिकोनाजोल या टेबुकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों के छिड़काव से इसे रोका जा सकता है। इसके अलावा खट्टी लस्सी का छिड़काव करके भी इसे रोका जा सकता है।
white stem rot : सफेद तना गलन कैसे रोकें
यह भी एक फंगल रोग है, जो तने के निचले हिस्से पर सफेद रूई जैसी फंगस (white stem rot) के रूप में दिखता है। इससे पौधे का तना गल जाता है, जिससे पौधे सूख जाते हैं। इस रोग के कारण पूरी फसल भी खत्म हो सकती है। इसे रोकने के लिए डाइथेन एम-45 का प्रयोग किया जा सकता है। प्राकृतिक रूप से इस रोग के बचाव के लिए भी खट्टी लस्सी का छिड़काव किया जा सकता है।

