Rapid Rail: दिल्ली एनसीआर में रैपिड रेल नेटवर्क का बड़ा विस्तार होने जा रहा है यह तेज सफर के साथ ही भरोसेमंद भी है। जिसके चलते अब NCR में 4 मेगा कॉरिडोर बनने जा रहे है इससे मुख्य 8 शहरों को आपस में जोड़ा जाएगा। जिसमें गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद शामिल होंगें। यह पहल मुख्यता ट्रैफिक जाम से छुटकारा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए बनाए जा रहे है। कॉरिडोर के बनते ही यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
एनसीआर में रैपिड रेल क्यों है इतनी जरूरी Rapid Rail
रोजाना करीब 80 लाख से अधिक लोग दिल्ली एनसीआर में एक शहर से दूसरे शहर आते जाते हैं। जिसके चलते सड़को पर भी जाम की स्थिति बन जाती है और बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि के कारण भी यह कॉरिडोर बहुत अहम् है। इससे प्रदूषण कम करने में मदद करती है, कामकाजी लोगों का समय बचाती है इसी के चलते हाई स्पीड रैपिड रेल रीड के रूप में विकसित की जा रही है।
डीपीआर तैयार
नोएडा से गुरुग्राम रैपिड रेल के लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है। जो इफ्को चौक गुरुग्राम से सूरजपुर ग्रेटर नोएडा तक हाई स्पीड रेल की रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। एक अधिकारी के मुताबिक यह कॉरिडोर तेज स्पीड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बनेगा और दो औद्योगिक हब को आपस में जोड़ेगा।
फरीदाबाद से ऐसे गुजरेगा यह कॉरिडोर
फरीदाबाद से गुजरने वाला यह कॉरिडोर गुरुग्राम सेक्टर 54 से शुरू होगा और फरीदाबाद के बाटा चौक से गुजरेगा फिर सेक्टर 85 और 86 होते हुए आगे बढ़ेगा और नोएडा सेक्टर 142 से 168 तक जाएगा जिसके बाद अंत में सूरजपुर ग्रेटर नोएडा पहुंचेगा। इस पूरे मार्ग पर छह स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिससे घनी आबादी वाले आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र सीधे नेटवर्क से जुड़ेंगे। इस प्रोजेक्ट की लागत एक अनुमान के अनुसार करीब 15 हज़ार करोड़ रुपये है।
यह हरियाणा में तीसरा नमो भारत रैपिड रेल प्रोजेक्ट होगा। इस प्रोजेक्ट से रियल एस्टेट को नई मांग मिलेगी, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, इस प्रोजेक्ट कार्य के चलते आस पास की सम्पति मूल्य में करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है। इससे पहले दिल्ली गुरुग्राम मानेसर बावल कॉरिडोर जिसकी अनुमानित लगत 32 हजार करोड़ रुपये इसकी भी तैयारी चल रही है और दिल्ली पानीपत करनाल कॉरिडोर की अनुमानित लागत 33 हजार करोड़ रुपये कही जा रही है। ये दो योजना भी सरकार की मंजूरी का इंतज़ार कर रही है।
मंजूरी के बाद काम में तेजी होगी और भूमि अधिग्रहण और डिजाइन पर काम शुरू होगा फिर निर्माण कार्य पर जोर दिया जाएगा। यदि समयसीमा के अनुसार काम हुआ तो अगले कुछ सैलून में एनसीआर की यात्रा तस्वीर बदल सकती है।

