Namo green rail Update : हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल को लेकर तेजी से काम चल रहा है। लखनऊ से पहुंची RDSO की टीम ने शुक्रवार को हाइड्रोजन ट्रेन में वायरिंग और प्लेटिंग का काम किया। ट्रेन में प्लेटिंग और वायरिंग का काम सुरक्षा, टिकाऊपन और बेहतर संचालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। प्लेटिंग में जिंक-निकल कोटिंग जैसी तकनीक घर्षण प्रतिरोधी पुर्जों और जंग की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाती हैं। देर शाम पूरी ट्रेन को यार्ड से बाहर लाकर करीब 50 मीटर तक चलाकर टीम ने जांच की। उसके बाद करीब आठ बजे वापस ट्रेन को यार्ड के अंदर ले जाया गया।
वहीं दूसरी तरफ हाइड्रोजन प्लांट (hydrogen Plant) के अंदर भी टेस्टिंग का लगातार काम जारी है। शुक्रवार को भी दिल्ली से एक टीम प्लांट में पहुंची थी। जिसने तैयारियों का जायजा लिया और प्लांट से जुड़े अधिकारियों के साथ चर्चा की। संभावना जताई जा रही है कि वायरिंग व प्लेटिंग का कार्य पूरा होने व अन्य जांच प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सोमवार से हाइड्रोजन ट्रेन का रनिंग ट्रायल शुरू हो सकता है। देश की ये पहली हाइड्रोजन ट्रेन है, ऐसे में रेलवे भी इस ट्रेन के संचालन को लेकर किसी तरह की जल्दी नहीं चाहता है।

ट्रेन (hydrogen train) के संचालन से पहले इंजन की क्षमता, कंट्रोल, ब्रेकिंग सिस्टम सहित सभी सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जा रही है। 29 जनवरी से तीन फरवरी तक भंभेवा स्टेशन पर हाइड्रोजन ट्रेन के एक इंजन की टेस्टिंग की जा चुकी है। तब डीजल इंजन की मदद से हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन को भंभेवा ले जाया गया था। यहां चेन्नई की मेधा कंपनी व दिल्ली से रेलवे कर्मचारी भी टेस्टिंग के लिए पहुंचे थे। इस दौरान इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की गई थी। रेलवे की तकनीकी टीम और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में यह टेस्टिंग की गई थी।
Namo green rail : नमो ग्रीन रेल में दो इंजन व आठ कोच हैं
हाइड्रोजन ट्रेन (hydrogen train) के ट्रायल को लेकर लखनऊ से आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) टीम जींद पहुंच चुकी है। टीम के साथ आए स्पेशल कोच में वायरिंग और ट्रायल से संबंधित सामान लाया गयाा है। टीम ने हाइड्रोजन प्लांट के यार्ड में खड़ी ट्रेन की वायरिंग का काम शुरू कर दिया है। वायरिंग के साथ- साथ टीम तैयारियों का जायजा लेगी। उसके बाद ट्रायल (hydrogen train) को लेकर समय निर्धारित किया जाएगा। अगर जांच में सब सही पाया जाता है, तो जल्द ही ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार दो सप्ताह तक जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (hydrogen train) का ट्रायल किया जाएगा।
इस ट्रेन में दो इंजन और आठ कोच हैं। 29 जनवरी को एक इंजन को जींद रेलवे जंक्शन से भंभेवा रेलवे स्टेशन पर ले जाया गया था और छह दिन तक इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की गई थी। अब पूरी ट्रेन का ट्रैक पर रनिंग ट्रायल किया जाएगा। जिसमें इंजन के स्टार्ट होने में लगने वाले समय, लोड, हाइड्रोजन गैस (hydrogen gas) एवरेज को परखा जाएगा। ट्रायल के दौरान किसी एक स्टेशन पर ले जाकर भी टेस्टिंग की जा सकती है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की पहली हाइड्रोजन गैस से चलने वाली नमो ग्रीन रेल का उद्घाटन करेंगे।

Namo green rail : भारतीय रेलवे के इतिहास में मील का पत्थर
यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के लिए मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इसमें प्रदूषण रहित ईंधन तकनीक का सफल परीक्षण किया जाना है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगभग 89 किलोमीटर लंबे जींद- सोनीपत रेलवे ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन को चलाया जाएगा। चेन्नई की मेधा कंपनी ने हाइड्रोजन ट्रेन को तैयार किया है। ये पूरी तरह से स्वदेशी, प्रदूषण-रहित और आधुनिक तकनीक पर आधारित है। इसमें आठ कोच में करीब 600 यात्री सफर कर सकेंगे। वहीं जींद रेलवे जंक्शन पर करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से हाइड्रोजन प्लांट बनाया गया है। जिससे इस ट्रेन के लिए हाइड्रोजन गैस की आपूर्ति होगी।
Namo green rail Hydrogen train मामले में अब तक क्या- क्या हुआ
एक जनवरी को हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली से जींद रेलवे जंक्शन पर पहुंची थी। उसके बाद ट्रायल के लिए लखनऊ से आरडीएओ की टीम भी आ गई थी। लेकिन ट्रायल के लिए ट्रैक व ट्रेन तैयार नहीं थी। जिसके चलते ट्रायल टल गया था और आरडीएसओ की टीम वापस चली गई थी। आरडीएसओ टीम के निर्देशानुसार से जींद- सोनीपत ट्रैक के आसपास से झाड़ियों को साफ किया गया। वहीं मेधा कंपनी की टीम ने ट्रेन के इंजन को भंभेवा स्टेशन पर ले जाकर छह दिन तक उसकी जांच की। अब दोबारा वीरवार को आरडीएसओ टीम ट्रायल करने के लिए वीरवार को जींद पहुंची है। आरडीएसओ की तरफ से रेलवे को ट्रायल का पूरा प्लान दिया जा चुका है।

