Karnal Pashu Mela: हरियाणा के करनाल जिले में आयोजित पशु मेले में इस बार एक गाए ने इतना दूध दिया जिसे देखकर सभी ढंग रह गाए। झिंझाड़ी गांव के डेयरी फार्म की गाय चन्नौ ने दूध उत्पादन में सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है गाए ने 24 घंटे में करीब 77 लीटर दूध देकर पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि ने न केवल पशुपालकों को प्रेरित किया बल्कि डेयरी क्षेत्र में वैज्ञानिक पशुपालन की संभावनाओं को भी उजागर किया।
दूध उत्पादन प्रतियोगिता में चन्नौ गाय का शानदार प्रदर्शन Karnal Pashu Mela

जैसे की पहले भी बताया गया है कि करनाल पशु मेले में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य उच्च दूध देने वाली गायों की पहचान और पशुपालकों को प्रोत्साहित करना था। इस प्रतियोगिता में कई डेयरी फार्म से पशु लाए गए थे, लेकिन चन्नौ गाय का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। 24 घंटे में लगभग 77 से 78 किलोग्राम दूध देकर इस गाय ने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन से यह साबित होता है कि सही देखभाल और पोषण से भारतीय डेयरी उद्योग को और मजबूत बनाया जा सकता है। Karnal Pashu Mela
झिंझाड़ी गांव के डेयरी फार्म की सफलता की कहानी
इस उपलब्धि के पीछे झिंझाड़ी गांव के पशुपालक सुनील मेहला और उनके परिवार की मेहनत है। सुनील मेहला के अनुसार वे इस मेले में पांच गायें लेकर आए थे। इनमें से एक गाय ने लगभग 78 लीटर दूध दिया जो अन्य गायों का उत्पादन करीब 74 लीटर रहा हालांकि प्रतियोगिता में उनके पशुओं ने पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। यह सफलता एक गाय तक ही नहीं बल्कि पुरे डेयरी फार्म की गुणवत्ता को भी दर्शाती है।
2016 में शुरू हुआ डेयरी व्यवसाय Karnal Pashu Mela
सुनील मेहला बताते हैं कि उनका परिवार कई वर्षों से पशुपालन से जुड़ा है, लेकिन उन्होंने 2016 में व्यवस्थित रूप से डेयरी व्यवसाय शुरू किया। आज उनके फार्म में लगभग 200 पशु हैं।
2018 के बाद से उन्होंने देश के विभिन्न पशु मेलों और प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया और कई बार पुरस्कार भी जीते। डेयरी विशेषज्ञों के अनुसार यह उदाहरण दर्शाता है कि अगर पशुपालन को आधुनिक तरीके से किया जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आय का स्रोत बन सकता है। Karnal Pashu Mela
गायों की देखभाल का खास तरीका
उच्च दूध उत्पादन के पीछे सही पोषण और देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सुनील मेहला के अनुसार उनकी गायों के लिए विशेष आहार दिया जाता है, जिसमें शामिल हैं इसमें साइलेज और हरा चारा संतुलित पशु फीड के अलावा सूखी तूड़ी का प्रयोग करतें है।
इसके अलावा मौसम के अनुसार पशुओं के लिए अलग व्यवस्था की जाती है ताकि उन्हें गर्मी और ठंड से सुरक्षित रखा जा सके। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित पोषण और साफ वातावरण से दूध उत्पादन में काफी सुधार होता है।
कई बार खरीदने के प्रस्ताव आए
सुनील मेहला ने बताया कि चन्नौ जैसी उच्च उत्पादन देने वाली गायों के लिए कई बार खरीद के प्रस्ताव आए हैं। लेकिन उन्होंने इन्हें बेचने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार ये पशु केवल आर्थिक संपत्ति नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इन गायों की वजह से उनके गांव का नाम भी पशुपालन के क्षेत्र में पहचान बना रहा है।

