LPG alternative cooking: एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ रहा इंडक्शन चूल्हा उपयोग, LPG आपूर्ति पर दबाव घटेगा

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LPG alternative cooking: देश में लगातर LPG की आपूर्ति को लेकर नई नई चर्चाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है। इसी के चलते बजली से चलते वाले चुहलें की और अब सभी ने रुख कर लिया है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार भारत में पर्याप्त बिजली का उत्पादन हो रहा है जिसके चलते इसे घरेलू उपयोग में लाया जा सकता है। LPG alternative cooking

जिसके चलते बिजली आपूर्ति पर कोई ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। सरकार के मुताबिक अभी देश में बिजली उत्पादन की क्षमता कड़ी है जिसे भविष्य में बढ़ रही जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

भारत में बिजली उत्पादन क्षमता कितनी है LPG alternative cooking

LPG alternative cooking: एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ रहा इंडक्शन चूल्हा उपयोग, LPG आपूर्ति पर दबाव घटेगा
LPG alternative cooking: एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ रहा इंडक्शन चूल्हा उपयोग, LPG आपूर्ति पर दबाव घटेगा

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 5,24,000 मेगावाट से अधिक है। इसके मुकाबले हाल ही में दर्ज की गई अधिकतम मांग करीब 2,36,000 मेगावाट रही। जिसके चलते बिजली का उत्पादन मांग के अनुसार करीब 2 गुना है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दशक में भारत ने बिजली उत्पादन ढांचे में तेजी से निवेश किया है, जिसमें थर्मल, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा शामिल हैं। जिसके चलते भारत में आज जरूरत से ज्यादा बिजली ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।

ऊर्जा विश्लेषक प्रोफेसर अरविंद मिश्रा के अनुसार

वर्तमान समय में भारत में बिजली ऊर्जा का उत्पादन पहले की तुलना में काफी तेज हो रहा है। यह बिजली उत्पादन का ढांचा मजबूत होने के कारण ही हो रहा है। कई घरेलू उपकरणों नए बनने के कारण अब बिजली का उत्पादन भी बढ़ रहा है। लेकिन अभी उत्पादन की क्षमता काफी मजबूत है।

इंडक्शन चूल्हा क्यों बन रहा लोकप्रिय विकल्प

शहरी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में इंडक्शन कुकर का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। इसमें सबसे पहला गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम करना और बिजली से तेज और नियंत्रित कुकिंग होती है जिसके चलते यह सुरक्षा के लिहाज से बेहतर विकल्प है और छोटे परिवारों के लिए सुविधाजनक भी है। इस चूल्हे में बिजली की चुंबकीय ऊर्जा सीधे बर्तन को ही गर्म करती है। जिसके चलते ऊर्जा की खपत भी कम होती है।

अक्षय ऊर्जा पर बढ़ रहा फोकस

सरकार का ध्यान अब सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय स्रोतों पर तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि सौर ऊर्जा की एक चुनौती यह है कि यह दिन के सीमित समय में ही उपलब्ध होती है। लेकिन जानकारों के मुताबिक भारत को भविष्य की जरूरतों के लिए ऊर्जा स्रोतों का संतुलित मिश्रण बनाए रखना होगा। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है।

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