Haryana Crop Compensation: 15 अप्रैल से पहले कर लें यह काम, वरना नहीं मिलेगा फसल खराबे का पैसा: हरियाणा सरकार का आदेश

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Haryana Crop Compensation: हरियाणा में हाल ही में हुई बारिश के साथ ओलावृष्ट ने किसान की मेहनत से तैयार की हुई फसल पर पानी फेर दिया है। लेकिन अब हरियाणा सरकार की और से राहत की खबर सामने आ रही है। बता दें कि सिरसा और फतेहाबाद, हिसार जैसे जिलों में फसल का ज्यादा नुकसान हुआ है। हालाँकि कुरुक्षेत्रा के लाडवा में भी काफी ओले गिरे है। जिसके चलते CM ने इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए किसानों को आर्थिक रूप से सहायता करने का भरोसा दिलाया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें सरकार अकेला नहीं छोड़ेगी। नुकसान के आकलन के बाद किसानों के खातों में मुआवजे की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी।

इन जिलों के लिए खुला पोर्टल, तुरंत करें पंजीकरण Haryana Crop Compensation

Haryana Crop Compensation: 15 अप्रैल से पहले कर लें यह काम, वरना नहीं मिलेगा फसल खराबे का पैसा: हरियाणा सरकार का आदेश
Haryana Crop Compensation: 15 अप्रैल से पहले कर लें यह काम, वरना नहीं मिलेगा फसल खराबे का पैसा: हरियाणा सरकार का आदेश

सरकार ने नुकसान की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को लाइव कर दिया है। फिलहाल सिरसा, हिसार और फतेहाबाद के किसान इस पोर्टल पर अपना ब्यौरा दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि कुरुक्षेत्र और अन्य प्रभावित जिलों के लिए भी जल्द ही पोर्टल एक्टिव कर दिया जाएगा।

यह सुविधा उन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपनी फसलों का बीमा नहीं करवा रखा है। मुआवजे की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य शर्त है।

आवेदन की अंतिम तिथि और जरूरी प्रक्रिया

सिरसा जिले के प्रभावित गांवों जैसे गदरणा, तारुआना, जोगेवाला, फूल्लो, हेबुआना, भरोखां और बरूवाली-1 के किसान 15 अप्रैल तक अपना पंजीकरण पूरा कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया सरल रखी गई है वही किसान इसके लिए अपने नजदीकी सीएससी CSC सेंटर पर जाकर पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन करते समय प्रभावित फसल के फोटो अपलोड करना आवश्यक है ताकि नुकसान की गंभीरता स्पष्ट हो सके। और पोर्टल पर डेटा दर्ज होने के बाद राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें धरातल पर जाकर सर्वे करेंगी। जिसके बाद सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही मुआवजे की श्रेणी प्रतिशत के हिसाब से तय की जाएगी।

क्या होगा इस कदम का प्रभाव

हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है और रबी की फसल खासकर गेहूं यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ओलावृष्टि से कई गांवों में फसलें 70 से 80 फीसदी तक बिछ गई हैं। जानकारों का कहना है कि अगर मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और तेज रही, तो इससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए जरूरी पूंजी मिल सकेगी।

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