Haryana Electricity Rate: हरियाणा में बिजली उपभोगताओं के लिए राहत की खबर सामने आ रही है जिसके चलते अब हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने आगामी वित्त वर्ष के लिए बिजली दर के नियमों पर बड़ा फैसला लिए है। जिसके चलते वित्त वर्ष 2026 से 27 तक के लिए बिजली के नियम ज्यों के त्यों ही बने रहेगें। हालाँकि पहले ही सभी तरफ से मार झेल रहे लोगो के लिए अब राहत की खबर सामने आ रही है। जिसके चलते बिजली की दरों में कोई इजाफा नहीं किया गया है। Haryana Electricity Rate
आदेश में मुताबिक पुराणी बिजली दर ही आगे भी वैसे ही प्रभावी रहेगी। जिससे प्रदेश के करीब 84 लाख उपभोगताओं को अतरिक्त आर्थिक दबाव नहीं झेलना पड़ेगा।
उपभोगताओं के लिए राहत Haryana Electricity Rate

जैसे की पहले भी बताया गया है की इस फैसले से उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है बता दें कि बिजली की दरों में दोनों बिजली वितरण कंपनियों उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने आयोग के सामने अपनी वार्षिक राजस्व को लेकर याचिका दायर की थी जिसके चलते अगले वर्ष के लिए करीब 4,484.71 करोड़ रुपये का घटा दर्ज किया गया था। जिसके भरपाई के लिए टेरिफ बढ़ने की बात कही गई थी लेकिन आयोग में सुनवाई और विचार विमर्च के बाद इसे ज्यों के त्यों ही रखने का फैसला लिया गया है। ताकि उपभोगताओं को इससे राहत दी जा सकें।
1 अप्रैल से लागू होगा नया शेड्यूल Haryana Electricity Rate
आयोग के मुताबिक यह नया शेड्यूल 1 अप्रैल से ही लागु किया जाएगा जिसके चलते बिजली दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया गया है यह निर्णय से छोटे व्यपारियों को काफी लाभ होगा। इसे साथ ही मध्य वर्ग के लोगो को और किसानो के लिए भी राहत की बात है। Haryana Electricity Rate
सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। बिजली दरों में स्थिरता रहने से न केवल घरेलू बजट संभलेगा, बल्कि लघु उद्योगों की उत्पादन लागत में भी बढ़ोतरी नहीं होगी।
मध्यम वर्गीय परिवारों को लाभ
जैसे की पहले भी बताया गया है कि आयोग द्वारा तय किया गया यह नया टैरिफ शेड्यूल 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिजली दरों को स्थिर रखने का यह निर्णय छोटे व्यापारियों, मध्यम वर्गीय परिवारों और खास तौर पर किसानों के लिए बड़ी संजीवनी है। सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। बिजली दरों में स्थिरता रहने से न केवल घरेलू बजट संभलेगा, बल्कि लघु उद्योगों की उत्पादन लागत में भी बढ़ोतरी नहीं होगी।

