Haryana Orbital Rail Corridor: हरियाणा सरकार की और से राज्य में सार्वजानिक परिवाह व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कई महत्वपूर्ण परियोजनाए चलाई जा रही है जिसके चलते अब फिर सरकार द्वारा बड़ा फैसला लिया गया है CM की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रोजेक्ट की लागत में बदलाव करते हुए करीब डबल लागत कर दी है और मजूरी दे दी गई है। इस योजना का पहला बजट करीब 5,618 करोड़ रुपये से शुरू हुआ था जिसे अब बढ़कर 11,709 करोड़ रुपये कर दिया गया है। Haryana Orbital Rail Corridor
लागत में यह भारी-भरकम बढ़ोतरी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह बदलते बाजार, तकनीकी विस्तार और हरियाणा को लॉजिस्टिक्स का ग्लोबल हब बनाने की सरकार की नई रणनीति को दर्शाता है।
क्यों बढ़ गई प्रोजेक्ट की लागत Haryana Orbital Rail Corridor

किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट की लागत समय के साथ बढ़ना लाजमी है। जिसके चलते इस प्रजावत में भी कुछ तकनिकी विकास और कुछ बढ़ती महंगाई के कारण बजट को बढ़ा दिया गया है। बजट बढ़ने का अहम कारण जमीन का मुआवजा और अधिग्रहण एनसीआर क्षेत्र में जमीन की कीमतों में आया उछाल लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। इसके अलावानिर्माण कार्यों के कॉन्ट्रैक्ट पर पहले GST की दर 12 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 18 फीसदी हो गई है। अकेले इस बदलाव ने बजट पर करोड़ों का अतिरिक्त बोझ डाल दिया।
रेलवे की नई पॉलिसियों और आधुनिक सुरक्षा मानकों को अपनाने के कारण निर्माण लागत में इजाफा हुआ है। इसके अलावा एनसीआर क्षेत्र में नए पुलों का निर्माण और रेलवे यार्ड के ढांचे में बड़े बदलाव शामिल किए गए हैं जिसके चलते बजट बढ़ गया है।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का अनूठा मॉडल
यह प्रोजेक्ट हरियाणा रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के तहत एक संयुक्त रूप में तैयार किया जा रहा है। इसमें खास बात यह है कि सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स भी साझीदार हैं। यह मॉडल दर्शाता है कि औद्योगिक जगत को इस कॉरिडोर से कितनी उम्मीदें हैं।
खरखौदा से मानेसर तक: औद्योगिक क्रांति की नई पटरी
यह रेल कॉरिडोर सिर्फ मालगाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि हरियाणा के औद्योगिक भविष्य के लिए एक ‘लाइफलाइन’ साबित होगा। यह कॉरिडोर सीधे तौर पर खरखौदा, मानेसर और सोहना जैसे उभरते हुए औद्योगिक केंद्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। Haryana Orbital Rail Corridor
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ाव
इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि यह मौजूदा और प्रस्तावित माल ढुलाई गलियारों के साथ तालमेल बिठा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार कॉरिडोर शुरू होने के बाद माल परिवहन का समय आधा रह जाएगा, जिससे न केवल कंपनियों की लागत कम होगी बल्कि हरियाणा में निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे।

