Haryana Politics Devender vs Brijender : हरियाणा के जींद में उचाना विधानसभा सीट (Uchana seat) पर रिकाउंटिंग नहीं करवाने की मांग को लेकर विधायक देवेंद्र अत्री द्वारा लगाई गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब दूसरे पक्ष के नेता और चुनाव हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई की संभावना है। ऐसे में उचाना की राजनीति का सियासी संग्राम अब रोचक होने जा रहा है।
बता दें कि कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उचाना विधानसभा चुनाव में रिजेक्ट हुए वोटों की गिनती दोबारा से करवाई जाए, क्योंकि जीत-हार का अंतर रिजेक्ट वोटों की संख्या से कम था, इसलिए नियमानुसार गिनती की जानी चाहिए। हाई कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई चल रही रही थी कि उचाना विधायक देवेंद्र अत्री सुप्रीम कोर्ट में चले गए थे और देवेंद्र अत्री ने याचिका लगाई थी कि उचाना विधानसभा रिकाउंटिंग नहीं हो, क्योंकि फैसला हो चुका है।

Haryana Politics : अब हाईकोर्ट अगली तारीख देने के लिए स्वतंत्र
इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बृजेंद्र सिंह की याचिका पर अगली तारीख देने के लिए स्वतंत्र है। अब मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ही चलेगा। बता दें कि उचाना विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री को 48 हजार 968 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को 48 हजार 936 वोट मिले थे। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह 32 वोटों से हार गए थे। इस चुनाव में 600 के करीब बैलेट पेपर की काउंटिंग की गई थी, तो इनमें से 215 वोट त्रुटियों के कारण रिजेक्ट या कैंसिल हो गए थे।
Haryana Politics : 150 वोटों की होनी है दोबारा से गिनती
कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह के अनुसार करीब 150 वोटों पर दोबारा से रिकाउंटिंग होनी हैं, क्योंकि ये वो वोट थे, जो पोस्टल बैलेट के ऊपर लगे स्कैनर के स्कैन नहीं हो पाने के कारण रिजेक्ट कर दिए गए थे। अगर जीत-हार का अंतर कम है तो नियमानुसार इन रिजेक्ट वोटों की दोबारा से गिनती होनी चाहिए। अगर स्कैनिंग नहीं हो तो इन लिफाफों को कैसे खोलना है, इसकी प्रक्रिया है और इसकी प्रक्रिया के अनुसार इन वोटों की दोबारा से गिनती की जानी चाहिए थी।

