HPV Protest Haryana : कैंसर से बचाव को लेकर तैयार की गई एचपीवी (HPV) वैक्सीन का विरोध शुरू हो गया है। हरियाणा के जींद जिले के बड़ौदा गांव की पंचायत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एफिडेविट देंगे, तभी एचपीवी का टीका लगने देंगे। इस मामले में बड़ौदा गांव की पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल व उप स्वास्थ्य केंद्र में अधिकारियों से की बातचीत की और कहा कि वह बिना लिखित जिम्मेदारी के एक भी बच्ची को टीका नहीं लगने देंगे
बता दें कि गांव बडौदा में सर्वाइकल कैंसर की एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन को लेकर ग्राम पंचायत ने सख्त रुख अपनाया है। ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल सरपंच रेशम लाल, पूर्व सरपंच सुधीर चहल, जनता सरकार मोर्चा के सहसंस्थापक सदस्य संदीप चहल, पूर्व मेंबर विनोद कुमार, पूर्व पार्षद जितेंद्र चहल, सुरेश पूनिया, रामबीर ठेकेदार, बलजीत चहल, आशीष सिहाग ने सरकारी स्कूलों और उप स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर अधिकारियों व कर्मचारियों से इस विषय पर विस्तृत चर्चा की।
HPV Protest : वैक्सीन लगाने वाले डॉक्टर, स्कूल प्रिंसीपल दें एफिडेविट
पंचायत प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि गांव में बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जानी है तो संबंधित विभाग को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए लिखित हलफनामा देना होगा। यह एफिडेविट स्कूल के प्रिंसिपल, वैक्सीन लगाने वाले डॉक्टर या सरकार की ओर से दिया जाना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार का स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव सामने आता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग या अधिकारी की होगी।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक इस विषय में लिखित जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तब तक गांव में एक भी बच्ची को यह टीका नहीं लगाने दिया जाएगा। उनका कहना था कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। पंचायत सदस्यों ने यह भी कहा कि टीकाकरण से पहले अभिभावकों को वैक्सीन के लाभ, संभावित साइड इफेक्ट और पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जानी चाहिए। बिना अभिभावकों की सहमति और पूरी जानकारी के किसी भी बच्चे को टीका लगाना उचित नहीं है।

HPV Protest : ग्राम पंचायत क्यों कर रही एचपीवी का विरोध
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इस तरह के टीकाकरण अभियानों को लेकर ग्रामीणों में कई सवाल और आशंकाएं हैं। उनका कहना था कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावित करने में बड़ी संस्थाओं और दवा कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। प्रतिनिधियों ने इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और बड़ी दवा कंपनियों के प्रभाव वाला मॉडल बताते हुए कहा कि कई बार ऐसे अभियानों के पीछे फार्मा उद्योग के आर्थिक हित भी जुड़े होते हैं।उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को बिना पूरी जानकारी दिए किसी भी प्रकार का टीकाकरण करना उचित नहीं है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि पहले ग्रामीणों और अभिभावकों के सामने सभी तथ्यों को स्पष्ट करे, उसके बाद ही किसी अभियान को आगे बढ़ाया जाए।

पंचायत का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा हर निर्णय पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों की सहमति के साथ ही होना चाहिए। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी सरकारी योजना का विरोध करना नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि गांव के बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा हर निर्णय पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ लिया जाए।क्योंकि “सरकार को हमारी बच्चियों की शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता हो सकती है, लेकिन उनसे कहीं ज्यादा चिंता उनके माता-पिता और समाज को है। हमारे बच्चे हमारे अधिकार और हमारी जिम्मेदारी हैं, इसलिए उनके हित में सबसे सही फैसला भी हम ही सोच-समझकर ले सकते हैं।”

