Hydrogen Train Update जींद : हाइड्रोजन प्लांट में लगे सबमर्सिबल से निकलने वाले पानी के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कर्मचारी इसकी जानकारी PCME (प्रिसिंपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर) के साथ साझा करेंगे। ताकि सुधार को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा सके। प्लांट में इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया के जरिए पानी से हाइड्रोजन गैस बनाई जाती है।
बता दें कि इलेक्ट्रोलाइजर एक ऐसा उपकरण है, जो बिजली का उपयोग करके पानी को उसके घटकों, हाइड्रोजन और आक्सीजन गैसों में तोड़ता है, यह प्रक्रिया इलेक्ट्रोलिसिस कहलाती है। यह स्वच्छ, कम उत्सर्जन वाली हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया के लिए शुद्ध पानी की आवश्यकता होती है, ताकि गैस की गुणवत्ता और सुरक्षा (Hydrogen gas making) दोनों सुनिश्चित की जा सकें।
Hydrogen Train Update : लैब रिपोर्ट के बाद तय होगा, पानी कितना ट्रीट होगा
सबमर्सिबल से निकल रहे पानी में घुलनशील ठोस पदार्थों की मात्रा अधिक है, जो हाइड्रोजन गैस उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए रेलवे और प्लांट प्रबंधन की ओर से पानी का सैंपल जांच के लिए लैब में भेजा गया है। लैब रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि पानी को किस स्तर तक ट्रीटमेंट की जरूरत है या फिर किसी वैकल्पिक जल स्रोत का उपयोग करना पड़ेगा।
शुक्रवार को पीसीएमई दिल्ली से अपनी टीम के साथ निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। यहां उन्होंने पानी के टीडीएस (TDS) की जांच हर रोज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद आरओ से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। हालांकि मौखिक रूप से कर्मचारियों ने पीसीएमई को बताया था कि सबमर्सिबल वाले पानी का टीडीएस 500 से ज्यादा है।
पीसीएमई ने निर्देश दिए थे कि इस पानी को पौधों की सिंचाई के लिए नहीं प्रयोग किया जाए। अगर यह पानी पौधों की सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाएगा, तो पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। सैंपल रिपोर्ट पीसीएमई के साथ साझा की जाएगी, ताकि इसके बारे में वे सुधार को लेकर आवश्यक निर्देश दे सकें।
Hydrogen Train Update : ट्रायल के लिए अभी डेट तय नहीं
जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन एक जनवरी को जींद रेलवे जंक्शन पर पहुंच चुकी है। ट्रेन के ट्रायल के लिए आरडीएसओ की टीम भी पहुंच गई थी। लेकिन तकनीकी खामियों व तैयारी पूरी नहीं होने के कारण ट्रायल नहीं (Hydrogen Train trail date) हो सका था।
जिसके चलते आरडीएसओ की टीम वापस चली गई थी। वहीं हाइड्रोजन गैस में नमी भी आई हुई है। नमी सुखाने के बाद 99.99999 प्रतिशत शुद्ध हाइड्रोजन गैस ट्रेन में भरी जाएगी। प्लांट की तरफ से गैस के सैंपल गुरुग्राम सहित अलग- अलग स्थानों पर लैब भेजे गए हैं। तकनीकी खामियां दूर होने के बाद ट्रायल की डेट तय होगी।

