Jind CRSU : चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी में जल्द होंगी रेगुलर भर्तियां, लगी रोक हटी

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Jind CRSU Update : जींद की चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (CRSU) में रेगुलर स्टाफ भर्ती को लेकर लगी रोक अब हट चुकी है। जल्द ही यूनिवर्सिटी में रेगुलर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यूनिवर्सिअी के वीसी प्रो. रामपाल सैनी ने हाल ही में जापान के दौरे के बाद लौटते हुए हरियाणा डायरी को दिए इंटरव्यू में बताया कि CRSU जापान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ शैक्षणिक, शोध एवं कौशल-विकास के क्षेत्र में अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है।

CRSU में भर्तियों के सवाल पर वीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थायी भर्तियों पर लगा बैन पिछले साल हट चुका है। फिलहाल रोस्टर तैयार किया जा रहा है। जिसे स्वीकृति के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद भर्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पिछले कुछ साल में भर्तियों के दौरान रहे विवाद को लेकर वीसी ने कहा कि पूरी पारदर्शिता के साथ भर्तियां की जाएंगी। किसी तरह का जातीय या अन्य भेदभाव नहीं किया जाएगा। टीचिंग स्टाफ में 80 और नान टीचिंग डिपार्टमेंट में 70 से ज्यादा पदों पर भर्ती होनी है।

Jind CRSU : यूनिवर्सिटी की जापान के साथ साझेदारी

एक सप्ताह के जापान दौरे से लौटे वीसी ने मंगलवार को प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए बताया कि भारत- जापान उच्चतर शिक्षा मिशन और इंडिया- जापान विश्वविद्यालय लीडर्स समिट 2026 (12–17 जनवरी, टोक्यो) के अंतर्गत किया गया यह दौरा सफल रहा। कई जापानी संस्थानों ने सीआरएसयू के साथ साझेदारी की औपचारिक पेशकश की है। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में राजदूत से शिष्टाचार भेंट के साथ सीआरएसयू की वैश्विक शैक्षणिक एवं शोध यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

Jind CRSU Chaudhary Ranbir Singh University will soon have regular recruitments, the ban has been lifted.
Jind CRSU Chaudhary Ranbir Singh University will soon have regular recruitments, the ban has been lifted.

इस अवसर पर भारत–जापान शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त शोध, अकादमिक मोबिलिटी और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। सीआरएसयू को जापान की छह प्रमुख शैक्षणिक एवं संस्थागत इकाइयों से शैक्षणिक, शोध एवं तकनीकी सहयोग के लिए औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त हुए। जिनमें क्योटो विश्वविद्यालय, ओसाका मेट्रोपालिटन विश्वविद्यालय, कंसाई विश्वविद्यालय, टोक्यो विश्वविद्यालय, सोफिया यूनिवर्सिटी, जापान एक्सटर्नल ट्रेड आर्गेनाइजेशन शामिल रहे।

Jind CRSU : नई शिक्षा नीति से प्रभावित हुए जापानी

इन बैठकों में जापान के उच्च शिक्षा ब्यूरो के निदेशक सातो कुनियाकी और शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईएक्सटी)) के वरिष्ठ अधिकारी हमाया एकिगो के साथ भी महत्वपूर्ण संवाद हुआ। जापानी पक्ष ने सीआरएसयू के एनईपी-2020 आधारित शैक्षणिक माडल, शोध केंद्रित दृष्टि और डिजिटल क्षमताओं की सराहना की। वीसी ने बताया कि जापानी विश्वविद्यालय सीआरएसयू के दीर्घकालिक शैक्षणिक विजन,एनईपी–2020 के अनुरूप नवाचार, अकादमिक गुणवत्ता और डिजिटल अवसंरचना से प्रभावित हुए।

इस लिंक पर क्लिक कर आप देख सकते हैं यूनिवर्सिटी के वीसी का एक्सक्लुसिव इंटरव्यू CRSU के वीसी का स्पेशल इंटरव्यू

CRSU के वीसी का स्पेशल इंटरव्यूवीसी ने कहा कि जापान भारत को अपना रणनीतिक शैक्षणिक साझीदार मानता है और उच्च शिक्षा, शोध, मोबिलिटी तथा प्रतिभा विकास में दीर्घकालिक सहयोग के लिए उत्सुक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जापान के साथ यह साझेदारी सीआरएसयू को वैश्विक पहचान, विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, शोध, इंटर्नशिप एवं रोजगार और हरियाणा के युवाओं को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेगी। यह पहल सीआरएसयू की एक नई अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत है।

अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के अंतर्गत इन क्षेत्रों में संयुक्त कार्य किया जाएगा

  • -संयुक्त शोध परियोजनाएं एवं संयुक्त प्रयोगशालाएं
  • -फैकल्टी एवं छात्र आदान–प्रदान
  • -सेमीकंडक्टर, मटेरियल साइंस एवं एनर्जी सेक्टर
  • -क्लीन एवं ग्रीन फ्यूल, पर्यावरण संरक्षण
  • -इन्क्यूबेशन सेंटर, स्टार्टअप संस्कृति
  • -डिजिटल सेंट्रल लाइब्रेरी एवं स्मार्ट अकादमिक इंफ्रास्ट्रक्चर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ)
  • -युवाओं के लिए रोजगार व स्किल के बड़े अवसर
  • -टेक्नोलाजी ट्रांसफर
सीआरएसयू में इनक्यूबेशन और एक्सीलेंस सेंटर किए जाएंगे स्थापित

वीसी ने कहा कि भारत युवाओं का देश है, जबकि जापान में 80 से 90 साल तक के लोग काम कर रहे हैं। वहां युवा कम हैं। इसलिए बेरोजगार युवाओं को अलग- अलग क्षेत्र में कौशल प्रदान करके रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को अगले 10 साल में पूरा किया जा सकता है। युवाओं के कौशल विकास पर विश्वविद्यालय का विशेष फोकस रहेगा। विश्वविद्यालय में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करके युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

उद्यमी विश्वविद्यालय में मशीनें स्थापित करेंगे। जहां विद्यार्थी ट्रेनिंग लेकर काम कर सकेंगे, जिससे पढ़ाई के साथ वे पैसे भी कमा सकेंगे। कुछ माह में ये योजना सिरे चढ़ जाएगी। विश्वविद्यालय में केमिस्ट्री लैब भी बना रहे हैं। वहीं इंटरनेशनल एक्सीलेंस सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जिससे दूसरे देशों के विशेषज्ञों को भी जोड़कर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिलाया जाएगा। स्टाफ को ट्रेनिंग व शोध के लिए विदेश भेजा जाएगा।


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