Kurukshetra Cattle Fair: कुरुक्षेत्र पशु मेले में ‘कुबेर’ झोटा बना मुख्य आकर्षण, कीमत 21 करोड़ तक पहुंची

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Kurukshetra Cattle Fair: कुरक्षेत्र में एक बड़े पशु मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह 41वें राज्यस्तरीय पशु प्रदर्शनी मेले का आयोजन किया जा रहा है इसमें सबसे महंगें झोटे ने सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। फतेहाबाद जिले के नगोढी गांव का यह झोटा है और इसका नाम कुबेर है। इसका कद्द काफी शानदार है। उस प्रकार की नस्लें बहुत ही कम देखने को मिलती है जिसके चलते इसकी कीमत भी ज्यादा रखी गई है।

कुरुक्षेत्र पशु मेले में ‘कुबेर’ बना चर्चा का केंद्र Kurukshetra Cattle Fair

हर साल कुरुक्षेत्र में राज्यस्तरीय पशु मेला पशुपालकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा मंच माना जाता है. इस बार यहां हजारों की संख्या में पशुपालक अपने बेहतरीन नस्ल के पशु लेकर पहुंचे. जिसके चलते यहाँ कुबेर झोटा भी पंहुचा है , जिसकी नस्ल और शकल को देखकर सभी हैरान रह जातें है जिसके चलते यह सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। फतेहाबाद के एक पशुपालक किसान ने कहा कि यह झोटा अपनी नेसल बनावट और ताकत के लिए जाना जा रहा है । इस झोटे की ऊंचाई और चमकती हुई चमड़ी देखकर हर कोई यहाँ रुक जाता है।

21 करोड़ मिलने पर भी किसान ने नहीं बेचा

इस झोटे के मालिक का नाम विकास है उन्होंने बताया कि यह झोटा पुष्कर मेले में दुनिया के बेहतरीन झोटों में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि इस झोटे कि कीमत 21 करोड़ लग गई थी लेकिन उन्होंने फिर भी इसे बेचने से इंकार किया है। कीमत लगाने वाला व्यक्ति आंध्रप्रदेश का था। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी इस झोटे की कीमत 11 करोड़ लग गई थी। लेकिन किसान ने झोटा बेचने से इंकार नहीं बेचा।

विकास का कहना है कि कुबेर सिर्फ एक पशु नहीं बल्कि उनके परिवार का हिस्सा है और उनकी पहचान का प्रतीक बन चुका है.। कुबेर से हर महीने लाखों की कमाई होती है। जानकारी के मुताबिक इसके सीमन से हर महीने करीब 20 लाख रुपए तक की कमाई हो रही है और यह इटली, इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी इसकी आपूर्ति की जाती है , इस झोटे से अब तक करीब तीन हजार से ज्यादा बच्चे पैदा हो चुके हैं पशु प्रजनन विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले ऐसे झोटे किसानों के लिए आय का बड़ा साधन बन सकते हैं और इससे बेहतर नस्ल का विकास तेजी से होता है.

खानपान और देखभाल का विशेष ध्यान

कुबेर की देखभाल एक पेशेवर तरीके से की जाती है ताकि इसमें रोजाना लगभग 7 लीटर दूध में 250 ग्राम घी मिलाकर खिलाया जाता है और सर्दियों में गाजर और सप्ताह में एक दिन सूखे मेवे दिए जाते हैं प्रतिदिन करीब 5 किलोमीटर की सैर कराई जाती है और दो घंटे सरसों तेल से मालिश की जाती है , इसके रहने की जगह पर सफाई और तापमान का भी खास ध्यान रखा जाता है।

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