Mustard Price Today: हरियाणा में सरसों की फसल पक कर तैयार है जिसके चलते किसान अब फसल को काट कर मंडी में लेजाने को तैयार है। इसी के चलते 28 मार्च से सरसो की सरकारी खरीद भी सरकार की और से शुरू कर दी जा चुकी है। जिसके चलते हिसार में करीब 13 मंडियों में सरसो की खरीद शुरू हो चुकी है। Mustard Price Today
लेकिन अब तक सरकार के खाते में सरसों की बिक्री नहीं हुई है। क्योंकि इस बार किसान निजी तोर पर सरसों बेचकर ज्यादा मुनाफा कमा रहे है। क्योंकि MSP से कही ज्यादा मूल्य किसानो को खुली बोली में मिल रहा है।
MSP और खुली बोली में फर्क Mustard Price Today

केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। वहीं, हिसार की मंडियों में प्राइवेट आढ़ती और व्यापारी किसानों को 6,800 रुपये तक का भाव दे रहे हैं। यानी सरकारी रेट से सीधे 600 रुपये प्रति क्विंटल का फायदा। Mustard Price Today
हिसार के किसान सतबीर धायल बताते हैं जब मंडी में खुली बोली में ही हमें सरकार से ज्यादा दाम मिल रहे हैं, तो हम सरकारी खरीद की लंबी प्रक्रिया और कम रेट का इंतजार क्यों करें? हमने अपनी फसल 6,800 रुपये के भाव में निजी आढ़ती को बेच दी है।”
डिजिटल नियमों की की उलझन के बिना बेच रहे किसान फसल
सिर्फ दाम ही नहीं, बल्कि सरकार द्वारा लागू किए गए नए कड़े नियम भी किसानों को सरकारी केंद्रों से दूर कर रहे हैं। इस बार खरीद प्रक्रिया में कई नई शर्तें जोड़ी गई हैं इसमें पोर्टल पर ऑनलाइन अनिवार्य पंजीकरण और ट्रैक्टर की नंबर प्लेट की फोटो और वेरिफिकेशन के अलावा गेट पास के लिए किसान के अंगूठे का निशान, मोबाइल पर आने वाले ओटीपी (OTP) की अनिवार्यता।
किसान नेता दिनेश सिवाच का कहना है कि इन तकनीकी पेचीदगियों के कारण आम किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इन कागजी औपचारिकता को सरल करे और पुरानी व्यवस्था बहाल करे ताकि किसानों को अपनी ही फसल बेचने के लिए धक्के न खाने पड़ें। Mustard Price Today
पानीपत समेत अन्य मंडियों का हाल Mustard Price Today
हिसार जैसी ही स्थिति पानीपत और आसपास के जिलों में भी बनी हुई है। पानीपत मंडी में खरीद के दूसरे दिन भी सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी। रविवार का अवकाश होने के कारण एजेंसियां नदारद रहीं, जबकि किसान अपनी उपज लेकर मंडी में डटे रहे। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार से कुछ किसान सरकारी केंद्रों का रुख कर सकते हैं, लेकिन बाजार भाव तेज होने के कारण प्राइवेट प्लेयर्स का पलड़ा भारी दिख रहा है।

