Success story : दो साल पहले सिलाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनी कुसुम, हर माह 14 से 15 हजार कमाई होती है, अब खुद की दुकान

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Success story : जींद के रामराये गांव की महिला कुसुम, जो पहले घर के ही कामकाम में लगी रहती थी। गांव की ही एक महिला ने उसे बताया कि वह पांडू पिंडारा कृषि विज्ञान केंद्र से सिलाई का प्रशिक्षण लेकर आई है। सिलाई का काम सीखकर खुद का रोजगार शुरू कर सकते हैं। जिससे प्रेरित होकर दो साल पहले कुसुम ने पांडू पिंडारा कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर सिलाई का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद घर पर ही कपड़े सिलने लगी। जिससे घर बैठे ही हर माह 14 से 15 हजार रुपये की कमाई हो जाती है।

कुसुम बनी गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा (Success story)

सिलाई का काम सीख कर कुसुम तो आत्मनिर्भर बनी ही, साथ ही परिवार को भी आर्थिक सहारा मिला। अपने काम को और आगे बढ़ाने के लिए गांव में ही एक महिला के साथ पार्टनरशिप में दुकान करेंगी। जहां सिलाई, कढ़ाई के साथ- साथ महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कुसुम से प्रेरित होकर गांव की दूसरी महिलाएं भी सिलाई, कढ़ाई व अन्य कार्य सीखकर अपना खुद का रोजगार शुरू कर रही हैं। कुसुम ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की हुई है। परिवार के पास करीब ढाई एकड़ जमीन है। पति योगेंद्र खेती करते हैं।

Success story: Kusum became self-reliant after taking tailoring training two years ago, earning 14 to 15 thousand rupees every month, now has her own shop
Success story: Kusum became self-reliant after taking tailoring training two years ago, earning 14 to 15 thousand rupees every month, now has her own shop

 

आज हिसार में होंगी सम्मानित (Success story)

कुसुम को स्वरोजगार के तौर पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सोमवार को हिसार में आयोजित कृषि मेले में सम्मानित भी किया जाएगा। कुसुम ने बताया कि पहले भी परिवार का खेती के सहारे काम चल रहा था। खेती से तो छह माह में एक बार आमदनी मिलती है। सिलाई करने से प्रतिमाह एक आमदनी तय हो गई है। जिससे घर के खर्च चलाने, बच्चों की फीस देने में आसानी रहती है। अगर खुद के लिए भी कुछ लेना है, तो उसके लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

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