Success Story : जींद जिले के गांव चांदपुर निवासी नीलम ने गो पालन और प्राकृतिक खेती से अपनी अलग पहचान बनाई है। 10 साल पहले नीलम ने गो पालन शुरू किया। फिर पति सुशील के साथ गांव में गोशाला भी खोली। गायों के गोबर से खाद तैयार कर अपने खेतों में प्रयोग की।
सवा पांच एकड़ में प्राकृतिक खेती (Success Story)
प्राकृतिक तरीके से खेती करने की इच्छा जगी और उन्होंने हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) से प्राकृतिक खेती को लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने गायों के गोबर व गोमूत्र से बनी जीवामृत व घन जीवामृत का प्रयोग करने लगी। सवा पांच एकड़ में प्राकृतिक खेती करते हैं। नीलम आंवले से मुरब्बा, चटनी व च्यवनप्राश, बाजरे से नमकीन व बिस्कुट, नींबू मिर्च से अचार बना रही हैं। वहीं गाय के गोबर से मंजन, भस्म, हवन सुविधाएं, पंच गव्य व अन्य उत्पाद बनाती हैं। शुरुआत में उन्होंने चार गायों से गो पालन की शुरूआत की थी। अब उनके पास लगभग 20 गाय हैं।

पति को प्राकृतिक खेती के लिए किया प्रेरित (Success Story)
पति सुशील पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। नीलम ने ही उन्हें प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया। खुद प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया। जिसके बाद धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़े। प्राकृतिक खेती से उत्पादन बढ़ा। पराली से मल्चिंग करने से खेत में पानी की खपत भी कम हो गई।
बाग में अमरूद के पेड़, आडू, आम, आंवला के लगे पेड़ (Success Story)
खेत में अमरूद, आडू, आम, आंवला के पेड़ हैं। वहीं अरहर, हल्दी के साथ- साथ मसालों की भी खेती करते हैं। हल्दी की पैकिंग कर वे बाजार में बेचते हैं। आंवला कम रेट में बिकता था। इसलिए उन्होंने आंवले का मुरब्बा और आंवले की कैंडी बनाना शुरू किया, जो ज्यादा दाम में बिकने लगे। इस कार्य में नीलम चार महिलाओं व पांच युवकों को भी लगाया हुआ है। जिससे उन्हें भी रोजगार मुहैया हो जाता है।

