Rape law India: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम मुद्दे पर फैसला लिया है जिसमें कहा गया है की अगर 2 व्यस्क लम्बे समय से साथ रहने पर आपसी सबंध बनाते है और बाद में रिश्ता टूटने पर इसे अपराध नहीं बताया जा सकता। कोर्ट की कार्यवाही में पता चला की आरोपी और महिला के बिच करीब 11 साल का संबध रहा है और रेकॉर्डस से यह साबित नहीं हुआ की यह संबंध धोखे या फिर जबरदस्ती बनाया गया है। जिसके चलते कोर्ट ने महिला की अपील को खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट के आरोपी को बरी कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला Rape law India

2022 में दर्ज एक आपराधिक शिकायत से यह मामला शुरू हुआ था जिसके चलते एक महिला वकील ने आरोप लगाया की आरोपी ने अपनी पहचान और वैवाहिक स्तिथि को गुमराह करते हुए उसके साथ कई सालों तक शरीरिक संबध बनाए। जिसके चलते महिला ने कहा कि उसे बाद में पता चला कि आरोपी विवाहित है जिसके चलते दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए। Rape law India
हालाकिं जाँच के बाद पता चला कि दोनों में संबंध काफी समयस से था और यह सार्वजानिक रूप से भी स्पष्ट था। जिसके चलते कुछ बातों पर विशेष ध्यान दिया गया इसमें कहा गया कि दोनों में करीब 11 साल पहले से संबंध थे। महिला आरोपी के साथ सार्वजानिक रूप से भी दिखी और पेशे से भी जुडी हुई थी। रिकॉर्ड से यह भी जानकारी मिली की महिला को आरोपी के बारे में लम्बे समय से जानकरी और विवाह के बारे में भी पता था। जिसके चलते इतने समय से कोई भी अप्रशिक शिकायत भी दर्ज नहीं हुई थी। जिसके चलते संबंध जबरन बनाया गया यह उचित नहीं माना जा सकता।
सहमति और आपराधिक कानून पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का उद्देश्य वास्तविक अपराधों को दंडित करना है, न कि व्यक्तिगत विवाद या असफल रिश्तों को अपराध का रूप देना। इसी के चलते कोर्ट ने कहा कि यदि संबंध सहमति से बना है, तो बाद में मतभेद होने पर उसे आपराधिक आरोप में नहीं बदला जा सकता।
कानून का प्रयोग किसी पर दबाव बनने या फिर निजी विवाद को सुलझाने के लिए नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी भारतीय आपराधिक कानून में सहमति की भूमिका को स्पष्ट करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय क्या कहती है
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सहमति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है। सहमति और धोखे के मामलों में अदालतें हमेशा तथ्यों और परिस्थितियों का गहराई से मूल्यांकन करती हैं। लंबे समय तक चले संबंध में सहमति एक महत्वपूर्ण कानूनी कारक बन जाती है। Rape law India
महिला अधिकारों पर काम करने वाली सामाजिक विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहरा कहती हैं यह जरूरी है कि वास्तविक यौन शोषण के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिले, लेकिन साथ ही कानून का संतुलित और तथ्य आधारित उपयोग भी सुनिश्चित होना चाहिए।

