Natural Farming Subsidy: हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: प्राकृतिक खेती पर हर साल मिलेंगे 10 हजार रुपये, जानें नई स्कीम

Date:

Natural Farming Subsidy: हरियाणा के किसानों के लिए सरकार काफी जबरदस्त स्कीम लेकर आई है। अब खादों और कीटनाशकों के बोझ तले दबी खेती को उभरने के लिए सरकार द्वारा नया कदम उठाया गया है। जिसके चलते मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बजट में प्राकृतिक खेती के लिए बजट और सब्सिडी का एलान किया है। सरकार इस नए कदम से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधर और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है।

विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अब खेती सिर्फ पैदावार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शुद्धता और स्वास्थ्य का पैमाना बनेगी। इसके लिए आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के रोडमैप में प्राकृतिक खेती को केंद्र में रखा गया है।

₹10,000 प्रति एकड़ की सीधी मदद: 5 साल तक मिलेगा साथ Natural Farming Subsidy

Natural Farming Subsidy: हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: प्राकृतिक खेती पर हर साल मिलेंगे 10 हजार रुपये, जानें नई स्कीम
Natural Farming Subsidy: हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: प्राकृतिक खेती पर हर साल मिलेंगे 10 हजार रुपये, जानें नई स्कीम

सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना में किसानों को अब केवल सलाह ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी सहायता दी जाएगी। इसी के चलते अब CM ने घोषणा की है कि जो भी किसान अपनी खेती के लिए प्राकृतिक खेती करने के लिए पंजीकरण करवाएगा उसे 5 साल तक 10 हज़ार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सालाना सब्सिडी दी जाएगी।

यह कदम उन किसानों के लिए संजीवनी साबित होगा जो रसायनों को छोड़कर कुदरती खेती की ओर मुड़ना चाहते हैं, लेकिन शुरुआत में कम पैदावार के डर से हिचकिचाते हैं। Natural Farming Subsidy

प्रमाणीकरण के लिए एपीडा बनेगा सारथी

इस प्राकृतिक खेती में सबसे बड़ी बाधा बाजार में सब्जियों को सही मूल्य दिलवाना है। जिसके चलते सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिएहरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी (HSSCA) को ‘एपीडा’ (APEDA) के तहत एक आधिकारिक प्रमाणीकरण संस्था बनाने का निर्णय लिया है। जिसके चलते हरियाणा के किसान द्वारा उगाया गया सामान अनाज फल और सब्जी केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में बिकेगा।

कुरुक्षेत्र का ‘गुरुकुल मॉडल’ बनेगा आधार

मुख्यमंत्री ने सदन में कुरुक्षेत्र के गुरुकुल फार्म का जिक्र करते हुए इसे एक आदर्श बताया। राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में 180 एकड़ में फैली इस भूमि पर बिना किसी यूरिया या पेस्टीसाइड के बम्पर पैदावार ली जा रही है। यहाँ केवल जीवामृत गाय के गोबर और गोमूत्र का घोल।

का प्रयोग किया जाता है और घनजीवामृत सूखा जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है इसके अलावा बीजामृत बीजों के उपचार के लिए प्राकृतिक मिश्रण। इन तीनों के मेल से तैयार ‘जीरो बजट खेती’ को अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। Natural Farming Subsidy

देसी गाय की खरीद पर ₹30,000 की भारी छूट

इसी के चलते प्राकृतिक खेती का आधार देसी गाय है। सरकार ने देशी गए खरीद के लिए करीब 30 हज़ार सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया है और जिसके चलते करीब 523 गाए के लिए 1.30 करोड़ की राशि जारी कर दी जा चुकी है। जीवामृत तैयार करने के लिए भी ड्रमों की खरीद के लिए अनुदान दिया जा रहा है। Natural Farming Subsidy

राजनीति से ऊपर उठकर मिट्टी बचाने की अपील

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि बढ़ते पेस्टीसाइड के उपयोग से वातावरण और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने सभी विधायकों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करें।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular

Recently Post
Related