Chandigarh News: चडीगढ़ में रहने वालो के लिए अगले वित् वर्ष के लिए बहुत ही अहम खबर आ रही है अब चंडीगढ़ वालों की जेब पर 1 अप्रैल से पहले से ज्यादा आर्थिक दबाव पड़ने वाला है। जिसके चलते चंडीगढ़ नगर प्रशासन की और से कुछ नए नियम बनाए गए है जिससे आम आदमी की जेब पर दबाव पड़ेगा इसमें पानी की कीमतों से लेकर कूड़ा उठान तक के खर्च में वृद्धि की गई है। Chandigarh News
जिसका सीधा असर मध्य वर्ग परिवार के महीने के बजट पर होगा। जिसके चलते अभी से लोगो में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पानी और सीवरेज के बिलों में ‘करंट’ Chandigarh News

जैसे जैसे गर्मी नजदीक आ रही है वैसे ही पानी की खपत भी बढ़ने लगी है। जिसके चलते अब पानी के बिलों में भी बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। प्रशासन ने पानी के टेरिफ में करीब 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। लेकिन कम पानी खर्च वाले परिवारों को कुछ राहत भी दी गई है लेकिन फिर भी हर यूनिट पर पहले से ज्यादा भुगतान ही करना होगा।
इतना ही नहीं, पानी के बिल के साथ जुड़कर आने वाले सीवरेज सेस में भी बढ़ोतरी की गई है। यह वार्षिक संशोधन का हिस्सा है, जिसे नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए यह ‘दोहरी मार’ जैसा है।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और प्रॉपर्टी किराया Chandigarh News
स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर को साफ रखने के लिए भी अब कीमत बढ़ा दी गई है जिसके चलते डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन के शुल्क में भी करीब 5 फीसदी ही बढ़ोतरी की गई है। जिसे प्रशासन की और से माकन के साइज़ के आधार पर तय किया है जिसके चलते छोटे माकन से बड़े बंगलो तक सभी की जेब पर असर होगा। Chandigarh News
इसके साथ ही, नगर निगम की संपत्तियों जैसे दुकानों और बूथों के किराए में भी इजाफा किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि किराए बढ़ने से उनकी लागत बढ़ेगी, जिसका अंतिम बोझ ग्राहकों पर ही पड़ेगा।
अब कम्युनिटी सेंटर में प्रोग्राम करना भी होगा महंगा
शहर के लोगों के लिए सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करना भी अब सस्ता नहीं रहेगा। नगर निगम ने कम्युनिटी सेंटर्स की बुकिंग दरों में 5 से 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। शादी-ब्याह या अन्य सामाजिक समारोहों के लिए जो लोग इन सेंटर्स पर निर्भर रहते हैं, उन्हें अब पहले के मुकाबले ज्यादा बजट आवंटित करना होगा।
प्रशासन का कहना है कि सुविधाओं के रखरखाव और बढ़ती लागत को देखते हुए ये शुल्क बढ़ाना जरूरी था। लेकिन सवाल यह है कि क्या सुविधाओं की गुणवत्ता में भी उसी अनुपात में सुधार होगा? फिलहाल तो शहरवासी 1 अप्रैल के उस ‘झटके’ का इंतजार कर रहे हैं, जो उनके घरेलू बजट को बिगाड़ने वाला है।

