Haryana education news : आगामी सत्र में राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाली नौवीं से 12वीं कक्षा की छात्राओं को भी 75 दिन फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध व प्रोटीन मिल्क बार दी जाएगी। इसके लिए विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है।
मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना आरंभ हुई (Haryana education news)
निदेशालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार राजकीय विद्यालयों की कक्षा नौवीं से 12वीं में पढ़ने वाली छात्राओं को पूर्ण पोषण प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना आरंभ की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को 75 दिन दूध और मिल्क बार दी जाएगी।

विद्यार्थियों को मिलेगा मिड डे मील (Haryana education news)
इसका वितरण अप्रैल माह से आरंभ किया जाएगा। इसलिए वर्तमान सत्र 2025-26 की इनरोलमेंट के आधार पर अप्रैल माह के लिए डिमांड बनाई गई है। पहले मिड-डे मील के तहत यह सुविधा आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिलती थी। राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को मिड डे मील दिया जाता है। दोपहर के समय विद्यार्थियों को चावल, दाल, रोटी, दूध, सहित अन्य चीजें मुहैया करवाई जाती है।
योजना में 12वीं कक्षा की छात्राएं होगी शामिल (Haryana education news)
अब नौवीं से 12वीं कक्षा की छात्राओं को भी योजना में शामिल किया गया है। योजना को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयवार और कक्षावार डिमांड की एक्सेल शीट स्कूलों को भेजी गई है। इसके आधार पर ही छात्राओं की संख्या तय कर आपूर्ति की जाएगी। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डिमांड का सत्यापन कर निदेशालय को भेजें।

10वीं और 12वीं कक्षा की डिमांड तय की गई (Haryana education news)
किसी स्कूल की डिमांड में बदलाव होता है तो उसे शीट में साझा करना होगा। डिमांड तैयार करते समय वर्तमान शैक्षणिक सत्र के नामांकन को आधार बनाया गया है। इसमें आठवीं कक्षा के नामांकन को 9वीं की संभावित संख्या माना गया है, जबकि नौवीं और 11वीं कक्षा के नामांकन के आधार पर क्रमशः 10वीं और 12वीं कक्षा की डिमांड तय की गई है।
छात्राओं को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य (Haryana education news)
मुख्यमंत्री दुग्ध योजना के तहत नए सत्र में नौवीं से 12वीं कक्षा की छात्राओं को फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध व प्रोटीन मिल्क बार दी जाएगी। इससे छात्राओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा और उन्हें बेहतर पोषण मिलेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई दी जा सके और उनके शैक्षणिक स्तर में सुधार किया जा सके।

