Hydrogen Train जींद में देश की पहले हाइड्रोजन ट्रैन की टेस्टिंग तेज कर दी गई है . जिसके चलते फिर से नई उम्मीद जाएगी है . अभी ठंड के चलते मौसम से जुडी नई तकनीक में नमी पर टेस्टिंग की जा रही है . ताकि ट्रैन का सही से संचालन किया ज सके .
क्या है ताजा अपडेट आइये जानें Hydrogen Train
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन की तीसरे दिन भी गहन टेस्टिंग की जा रही है। यह प्रक्रिया इंजन की सुरक्षा, लंबी उम्र को ध्यान में रखकर की जा रही है। इसके लिए इंदौर से मैकेनिकों की एक टीम को बुलाया गया है ताकि सही से जो हाइड्रोजन गैस में मौजूद नमी की जांच करी जा सके .
विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन इंजन में नमी का स्तर नियंत्रित रहना बेहद जरूरी है, ताकि अधिक नमी से इंजन के आंतरिक हिस्सों पर असर पड़ न पड़े।
सर्दी में क्यों बढ़ी जांच की जरूरत इसके पीछे की पूरी कहानी
जनवरी की कड़ाके की ठंड के कारण इंजन सिस्टम में नमी बनने की संभावना बढ़ जाती है। जिसके चलते से रेलवे ने बाहर से शुद्ध हाइड्रोजन गैस मंगवाई ताकि अच्छे से जाँच की जा सके और इसे इंजन में भरकर भंभेवा स्टेशन तक ट्रायल के लिए ले जाया गया। यहां बारीकी से परीक्षण हो रहा है की इंजन की आवाज और वाइब्रेशन कैसी है . ऊर्जा की खपत और लोड क्षमता के प्रभाव के आलावा ब्रेक सिस्टम की प्रतिक्रिया जैसी चीजों की जाँच की जा रही है .
हाइड्रोजन प्लांट में एक महीने से टेस्टिंग चल रही रेलवे सूत्रों के अनुसार, ट्रेन के विभिन्न सिस्टम की जांच की जा रही है। ताकि किसी तरह की तकनीकी बाधा सामने न आए। लंबी टेस्टिंग भविष्य में बड़े हादसों और लागत से बचाती है। इसी के चलते पानी और गैस की गुणवत्ता पर सख्त नजर रखी जा रही है . प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर डिंपी गर्ग ने अपनी टीम के साथ हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पानी की गुणवत्ता जांच के लिए TDS मीटर खरीदने और उसका डाटा रोजाना बोर्ड पर अपडेट करने के निर्देश दिए। गैस सैंपल की जांच भी की जा रही है .
हाइड्रोजन ट्रेन क्यों है खास हाइड्रोजन ट्रेन डीजल के मुकाबले कहीं ज्यादा पर्यावरण अनुकूल विकल्प मानी जाती है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी होने के साथ ही ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने के कारण भी अच्छा विकल्प है .

