Petrol Diesel price India: ईरान इजरायल तनाव के बीच भारत में पेट्रोल डीजल कीमतों पर स्थिति स्पष्ट

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नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान इजरायल संघर्ष के बीच भारत में पेट्रोल डीजल कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे और रिफाइंड तेल का भंडार मौजूद है। वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश भी जारी है।

हाल के पश्चिम एशियाई तनाव के बाद वैश्विक कच्चे तेल बाजार में हलचल देखी गई है। ऐसे में आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा। Petrol Diesel price India

भारत के पास कितना तेल भंडार है Petrol Diesel price India

Petrol Diesel price India: Amid Iran-Israel tensions, the situation on petrol and diesel prices in India is clear.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक लगभग 25 दिनों का कच्चा और रिफाइंड तेल स्टॉक करीब 100 मिलियन बैरल व्यावसायिक कच्चा तेल भंडार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ट्रांजिट में मौजूद जहाजों को मिलाकर 40 से 45 दिनों की संभावित आपूर्ति

भारत ने बीते वर्षों में रणनीतिक भंडार क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भूमिगत भंडारण सुविधाएं विकसित की गई हैं ताकि आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश को राहत मिल सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम है

भारत को मिलने वाला 50 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल पश्चिम एशिया से आता है। यह आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है।

ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ संजय माथुर के अनुसार

यदि इस मार्ग में व्यवधान आता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी देखी जा सकती है। हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी आयात बढ़ाया है, जिससे जोखिम कुछ हद तक कम हुआ है।

क्या बढ़ सकते हैं पेट्रोल डीजल के दाम

फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल डीजल कीमतों में तत्काल वृद्धि पर विचार नहीं हो रहा है। भारत में ईंधन मूल्य निर्धारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत और विनिमय दर पर निर्भर करता है। यदि वैश्विक बाजार में लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहती हैं तो घरेलू कीमतों पर दबाव बन सकता है। पिछले वर्षों में भी रूस यूक्रेन संघर्ष के दौरान कीमतों में उतार चढ़ाव देखा गया था, लेकिन सरकार ने टैक्स समायोजन और आपूर्ति विविधीकरण से असर को नियंत्रित किया था। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।

यह कच्चा तेल रिफाइनरियों में प्रोसेस होकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी में बदला जाता है। ऊर्जा सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक समाधान के लिए है।

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