Success Story : पहले खेतों में मजदूरी करती थी, फिर ट्रेनिंग लेकर मशरूम की खेती शुरू की, बढ़िया कमाई

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Success Story : जींद के गुरथली गांव की महिला संदीप कौर, जो परिवार के आर्थिक हालात कमजोर होने की वजह से खेतों में मजदूरी करती थी। मनरेगा में भी काम किया। विपरीत हालात में संदीप कौर ने हार नहीं मानी और साल 2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर छोटी- छोटी बचत करनी शुरू की। फिर ग्रुप सखी बनकर दूसरी महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह से जोड़ा। पहले दिनभर मजदूरी करके महीने में मुश्किल से चार से पांच हजार रुपये कमा पाती थी। फिर अपनी मेहनत के दम पर 20 से 25 रुपये महीना कमाने लगी और परिवार के हालात भी बेहतर होने लगे।

Success Story: Earlier she used to work as a labourer in the fields, then after taking training she started mushroom farming, earning good income
Success Story: Earlier she used to work as a labourer in the fields, then after taking training she started mushroom farming, earning good income

 

नरवाना में 300 गज जमीन किराये पर लेकर कच्चा शेड बनाया (Success Story)

मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लेकर पिछले साल अक्टूबर में नरवाना में 300 गज जमीन किराये पर लेकर कच्चा शेड बनाया और मशरूम की खेती शुरू की। कच्चा शेड लगाने और मशरूम के बैग खरीदने सहित अन्य सामान की खरीद में करीप पांच लाख रुपये खर्च आया। पहली बार में ही ढाई लाख रुपये की मशरूम बिकी। अब पक्का शेड बनाएंगे। जिससे गर्मी में भी मशरूम का उत्पादन हो सकेगा। शादियों के सीजन में मशरूम का रेट 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है।

खेत में मजदूरी करने के अलावा कोई काम करना नहीं आता था (Success Story)

संदीप कौर का मायका पटियाला में है। वे 12वीं कक्षा तक पढ़ी हुई हैं। साल 2009 में गुरथली गांव निवासी बिंद्र सिंह से शादी हुई। बिंद्र सिंह ग्रामीण चौकीदार हैं। संदीप कौर ने बताया कि पारिवार के आर्थिक हालात कमजोर होने के कारण काफी दिक्कतें थी। खेत में मजदूरी करने के अलावा कोई काम नहीं आता था। साल 2011 में उसने सिलाई करना सीखा, गांव में सिलाई सेंटर भी खोला। इससे भी परिवार को चलाना मुश्किल था। ऐसे में साल 2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला लिया। उनके साथ सिंसर गांव की रीना भी मशरूम की खेती करती हैं। जब भी मशरूम तोड़ने व अन्य कार्यों की लेबर की जरूरत पड़ती है, तो वे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ही बुलाती हैं।

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