Mahila sarpanch story : पौने 2 किलोमीटर से सिर पर पानी लाती थी महिलाएं, सरपंच आरती ने घर-घर पहुंचाया पेयजल

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Mahila sarpanch story : नरवाना उपमंडल के सुंदरपुर गांव, जहां पीने के पानी की बड़ी किल्लत थी। महिलाओं व पुरुषाें को पौने दो किलोमीटर दूर पड़ोसी गांव बडनपुर से पीने का पानी लेकर आना पड़ता था। गांव में जो जलघर में सच्चाखेड़ा माइनर से जो पानी मिलता था, उससे कुछ दिन ही सप्लाई हो पाती थी। सरपंच आरती ने कार्यभार संभालने के बाद साल 2023 में इस समस्या को गंभीरता से लिया।

गांव में क्या-क्या काम किए ? (Mahila sarpanch story)

गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने के लिए चंडीगढ़, जींद और नरवाना में अधिकारियों से मिली। गांव में बिछी पुरानी पेजयल लाइन जो जगह-जगह से लीक थी, उसकी जगह नई पाइप लाइन बिछाई। बडनपुर हैड पर ट्यूबवेल लगाकर गांव तक पाइप लाइन से पीने का पानी पहुंचाया। जिससे महिलाओं को पौने दो किलोमीटर दूर से सिर पर पानी ढोने से छुटकारा मिला। गांव के साथ बसी ढाणी के 15 परिवारों तक भी पाइप लाइन बिछाकर पेयजल की व्यवस्था की।

Mahila Sarpanch Story: Women used to carry water on their heads from 1.75 km, Sarpanch Aarti delivered drinking water to every house.

 

राष्ट्रपति ने सम्मानित किया (Mahila sarpanch story)

वहीं दूसरी ढाणी, जिसमें 30 परिवार रहते हैं, उन तक भी पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। अब सीधे भाखड़ा से पानी लाने के लिए भी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। पेयजल आपूर्ति, पेयजल संरक्षण व पेयजल जांच सहित संबंधित सभी कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देने पर सरपंच आरती को 11 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू की उपस्थिति में प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। आरती के साथ- साथ जल संरक्षण में सराहनीय कार्य करने वाली स्वयं सहायता समूह की सदस्य निशा को भी प्रशंसा पत्र मिला। जिन्होंने लोगों को पानी व्यर्थ नहीं बहाने के लिए प्रेरित किया।

भूमिगत पानी खारा है, समस्या को दूर करने की ठानी थी : सरपंच (Mahila sarpanch story)

सरपंच आरती ने बताया कि गांव में भूमिगत पानी खारा है। गांव की सबसे बड़ी पेयजल की समस्या को उन्होंने दूर करने की ठानी। इस कार्य में जनस्वास्थ्य विभाग के चीफ इंजीनियर नरवाल का विशेष सहयोग मिला। जल जीवन मिशन के तहत गांव में पेयजल व्यवस्था पर आठ से नौ करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई है। जलघर में एक टैंक है। एक और टैंक बनाया जा रहा है। अब गांव में पीने के पानी की कोई समस्या नहीं है। हर घर में पेयजल पहुंच रहा है।

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