Jind Education : रूपगढ़ गांव में अभिभावक बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए भेज रहे शहर

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Jind Education : जींद के गांव रूपगढ़ में स्वास्थ्यकर्मी मूर्ति देवी व मुकेश रानी के प्रयासों से बेटियों की शिक्षा में सुधार हुआ है। जहां पहले अधिकतर लड़कियां केवल 10वीं तक ही पढ़ पाती थीं, वहीं लड़कियां 12वीं तक अपनी शिक्षा पूरी कर रही हैं। इसी सकारात्मक बदलाव की कड़ी में अब करीब 40 प्रतिशत लड़कियां 12वीं के बाद जींद कालेजों व अन्य शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, जो गांव में बढ़ती जागरूकता और सोच में बदलाव का प्रमाण है। इसके साथ ही लिंगानुपात में भी सुधार देखने को मिला है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रति ग्रामीणों की जागरूकता (Jind Education)

इस वर्ष गांव रुपगढ़ में 10 बच्चों का जन्म हुआ है, जिनमें चार लड़के और छह लड़कियां शामिल हैं। यह संतुलित आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रति ग्रामीणों की जागरूकता और सकारात्मक सोच को दर्शाता है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा निरंतर किए जा रहे जागरूकता प्रयासों का परिणाम है, जो समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और शिक्षा के महत्व को मजबूत बना रहा है। गांव की कुल संख्या 4462 है, जिसमें मतदान 3200 के करीब होता है।

Jind Education: Parents in Roopgarh village are sending their daughters to the city for higher education.
Jind Education: Parents in Roopgarh village are sending their daughters to the city for higher education.

 

बेटियों को उच्च शिक्षा देने के लिए प्रेरित (Jind Education)

स्वास्थ्यकर्मी मूर्ति देवी व मुकेश रानी ने कहा कि गांव में बेटियों को अकसर उच्च शिक्षा देने से संकोच करते हैं। स्वास्थ्य कर्मियाें द्वारा समय-समय पर गांव में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसमें ग्रामीणों को बेटा व बेटी में अंतर नहीं करने व बेटियों को उच्च शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका परिणाम है कि गांव में अब बेटियों काे उच्च शिक्षा देने के लिए अभिभावक जींद शहर में महाविद्यालयों में भेजते हैं।

बेटियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे (Jind Education)

मूर्ति देवी व मुकेश रानी ने कहा कि आज के समय में बेटियां हर क्षेत्र में बेटों से आगे हैं। लड़कियां पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। कन्या भ्रूण हत्या समाज के लिए अभिशाप है। इसे दूर करने के लिए हर व्यक्ति को आगे आने की जरूरत है।

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