Section 163 Imposed in Jind : गेहूं की फसल की कटाई अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू हो जाएगी। किसान गेहूं की कटाई व रीपर से तूड़ी बनाने के बाद फसल अवशेष आग लगाते हैं। जिससे दूर तक आग फैलने के कारण खड़ी गेहूं की फसल भी जल जाती है। जिलाधीश मोहम्मद इमरान रजा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 में वर्णित प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत जिले में किसी भी प्रकार की फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों के जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाए हैं।

गेहूं अवशेष जलाने पर किसानों को क्या सलाह दी ? (Section 163 Imposed in Jind )
जिलाधीश ने कहा कि कटाई के बाद कुछ किसानों द्वारा गेहूं के फसल अवशेषों को जलाने की प्रवृत्ति अपनाई जा सकती है। यह अवशेष जलाना वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बनता है। जिससे पर्यावरण एवं जन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण अधिक होने से आंखों में जलन तथा उत्पन्न हुए धुंए से आमजन के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर हो जाती है।
सख्ती से पालना के लिए निर्देश (Section 163 Imposed in Jind )
कई बार अवशेषों में आग लगाने से उत्पन्न हुए धुएं के कारण राजमार्गों पर दुर्घटना भी हो जाती है। खेतों में चर रहे मवेशी भी आग की चपेट में आ जाते हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा फसल अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया हैं। जिसके अंतर्गत जुर्माने का भी प्रविधान किया गया है। हरियाणा सरकार द्वारा भी समय-समय पर आदेशों की सख्ती से पालना के लिए निर्देश दिए जाते हैं। जिलाधीश ने पुलिस विभाग के अधिकारियों को कहा कि उपरोक्त आदेशों की अवहेलना में अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जाए।

