ipl cricket rule: बवाल शुभमन गिल ने इम्पैक्ट प्लेयर नियम को बताया खेल के लिए खतरा

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ipl cricket rule:  IPL के 19वें सीजन की शुरुआत अब होने ही वाली है जिसके अब कुछ ही घंटे बाकि बचे है। लेकिन मैदान की जंग से पहले की कई नियमों को लेकर चर्चां शुरू हो गई है। कल 28 मार्च को शुरू होने जा रहे इस सीजन से पहले ही गुजरात टाइटंस के युवा कप्तान शुभमन गिल ने इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर सवाल उठाए है। यह मुद्दा कप्तानों की आधिकारिक बैठक मुंबई में उठाया गया है। ipl cricket rule

जिसके चलते शुभमण गिल ने कहा है यह नियम क्रिकेट की उस बुनियादी रूह के विपरीत है। जिसमें 11 खिलाड़ी अपनी जान से खेलते है।

क्रिकेट 11 का खेल है 12 का नहीं शुभमन गिल की दो-टूक ipl cricket rule

ipl cricket rule: बवाल शुभमन गिल ने इम्पैक्ट प्लेयर नियम को बताया खेल के लिए खतरा
ipl cricket rule: बवाल शुभमन गिल ने इम्पैक्ट प्लेयर नियम को बताया खेल के लिए खतरा

शुभमन गिल ने कहा कि इम्पैक्ट प्लेयर कप्तान के लिए कोई चुनौतियों से कम नहीं है। इससे ज्यादा कन्फ्यूजन पैदा हो रही है। गिल ने कहा जब शुरू के 3 से 4 विकेट गिर जाते है तो उस समय टीम के जज्बे और हौसले की असली पहचान होती है। लेकिन अब एक ज्यादा बल्लेबाज के आने से यह दबाव खत्म हो जाएगा। यह बात केवल गिल ही नहीं इससे पहले रोहित शर्मा भी यह बात कह चुके है। यह नियम ऑलराउंडर्स के करियर के लिए खतरा बताया जा रहा है। IPL 2026 Rule

क्योंकि जब टीम को हार्दिक पांडेय और शिवम दुबे जैसे प्लेयर से गेंदबाज़ी करवाने की ही आवश्यकता महसूस नहीं होती।

250 रन का पीछा करना अब बहादुरी नहीं

इस नियम के आने के बाद आईपीएल में रनों की ऐसी सुनामी आई है कि 200 का स्कोर भी सुरक्षित नहीं माना जाता। कप्तानों की बैठक में यह बात प्रमुखता से उठी कि आसान पिचों पर 230-240 रन का पीछा करना अब खेल के कौशल से ज्यादा बल्लेबाजों की मनमानी बन गया है। ipl cricket rule

गिल ने कहा है कि एक मुश्किल पिच पर 160 रन का बचाव करना असली कप्तानी और गेंदबाजी की कला है। इम्पैक्ट प्लेयर की वजह से टीमें बेखौफ होकर खेल रही हैं, जिससे गेंदबाजों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचता और मैच का संतुलन पूरी तरह बल्लेबाजों के पक्ष में झुक गया है।

क्या झुकेगा BCCI ipl cricket rule

हालाँकि दिलचस्प बात यह है जहा सभी दिग्गज क्रिकेटर इस नियम का लगातार विरोध कर रहे है वही BCCI अपने इस फैसले को 2027 तक लागु रखने के फैसले पर टिकी है। बोर्ड का मानना है कि इससे मैचों में रोमांच बढ़ता है और दर्शकों को चौके-छक्कों की बरसात देखने को मिलती है, जो ब्रॉडकास्टर्स के लिए फायदे का सौदा है।

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