Labor Day 1 May: वर्तमान में हम सभी ऑफिस में करीब 8 घटे ही कार्य करते है लेकिन 19वीं सदी के अंत तक ऐसा नहीं था। उस समय मजदुर करीब 15 घंटे भी कार्य करते थे। जिसके चलते आस पास कई शानदार इमारतें, और लम्बी सड़कें बनवाई जाती थी। और मजदुर दिन रात पसीना बहकर कार्य करते थे। Labor Day 1 May
दुनिया की हर छोटी चीज से लेकर बड़ी तकनीक के पीछे भी हाथ की म्हणत का मजदुर का ही हाथ है। जो कुम्हार से लेकर खेतों में काम करने वाले मजदुर और कई रचनात्मक कलाकार।
19वीं सदी में होती थी 12 घंटे तक की शिफ्ट Labor Day 1 May

जैसे की आज हम सभी दफ्तर में या किसी भी फैक्ट्री में केवल 8 घंटे की ही शिफ्ट करते है वैसे ही 19वीं सदी की बात करें तो उस समय 12 घंटे से लेकर 16 घंटे तक की शिफ्ट होती थी। जिसके चलते इस शोषण के विरुद्ध 1886 में 1 मई के दिन ही आवाज उठाई गई जिसके चलते अमेरिक में बड़ा जान आंदोलन हुआ। जिसके चलते मजदूरों ने मांग रखी की 8 घंटे काम के और 8 घटे आराम के और 8 घंटे ही मनोरंजन के लिए दिए जाए।
इसी आंदोलन के चलते शिकागो में बड़ी हिंसा हुई जिसके चलते कई मजदुर इस हिंसा में मरे गए। जिसके चलते यह आंदोलन की आग पूरी दुनिया में भड़क उठी। जिसके चलते फिर पेरिस में 1889 में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह फैसला लिया गया की 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदुर दिवस मान्य जाएगा।
नए नियमों से रुका मजदूरों का शोषण Labor Day 1 May
उस समय में अंग्रेजी शासन में भारत के मजदूरों का भी बहुत शोषण हुआ। जिसके चलते 1920 में इस शोषण के खिलाफ आवाज उठाई गई जिसके चलते इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना से लेकर लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने इसकी शुरुआत की जिसके बाद से 1 मई 1923 से लेकर मजदुर दिवस मनाया जाने लगा।
आजादी के बाद भी रखा मजदूरों के हितों का ध्यान
इसी के चलते देश की आजादी के बाद भी सविधान में मजदूरों के लिए नियम बनाए गए जिसके चलते न्यूनतम मजदूरी से लेकर पीएफ कानून के साथ ही कई अहम नीतिया बनाई गई। इसी के चलते वर्तमान में लेबर कोड्स के नियम से इसे और भी आसान बनाया जा रहा है। Labor Day 1 May
आज के समय में भी लेबर के सामने कई बड़ी चुनोतिया है जिसके चलते आज भी कई क्षेत्र में नौकरी को लेकर कोई गरंटी नहीं होती। इसी के चलते AI के आने से भी कई रोजगार छीन गए है। इसके अलावा कोरोना के समय भी कई मजदुर अपने गांव की और पैदल ही लोटे है जिसके चलते यह साफ है की मजदूरों के सामने आज भी कई चुनौतियां है।

