Vat Savitri Vart : उचाना शहर के प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी भारतेंदु शांडिल्य ने कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को सुहाग की सलामती,पति की लंबी आयु व पुत्र प्राप्ति के लिए वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत 16 मई को है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट यानि बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करने के बाद परिक्रमा करती हैं। उन्हें मां सावित्री और त्रिदेव के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान मिलता है। इस दिन शनि जयंती भी है।

शांडिल्य के अनुसार पौराणिक कथा अनुसार देवी सावित्री ने पति की रक्षा के लिए विधि के विधान तक को बदल दिया था। पुराणों के अनुसार पति को संकट से उबारने के लिए सावित्री ने घोर तप और व्रत किया। पूजा के बारे में पुजारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत में सुहागिन महिलाएं सुबह-सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करती है। दो टोकरियों में पूजा का सामान तैयार करती हैं। बरगद के पेड़ के नीचे बैठ कर कथा का श्रवण करती हैं। बरगद के पेड़ को जल से सींच कर, रोली,चंदन का टीका लगाकर कच्चे सूत के साथ बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं।

