एकता क्रांति। जींद। Jind Civil Hospital : जींद सिविल अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आजकल दलालों का जमावड़ा हो गया है। यह लोग पैसे लेकर दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करवा देते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें नागरिक अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट की मोहर व हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाने वाले युवक ने दिल्ली के रामजस कालेज में दाखिला लिया हुआ है। कालेज को जब इस प्रमाण-पत्र के फर्जी होने का अंदेशा हुआ तो उन्होंने इसे वेरिफिकेशन के लिए नागरिक अस्पताल जींद भेज दिया, जो जांच में फर्जी पाया गया। डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर इस मामले में फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने व बनवाने वाले दोनों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की अनुशंसा की है।
दस्तावेजों की वेरिफिकेशन के लिए नागरिक अस्पताल भेजा (Jind Civil Hospital)
रोहतक की डीएलएफ कालोनी निवासी अक्षत ने दिल्ली के रामजस कालेज में पिछले साल दाखिल लिया था। उसने कालेज में दाखिले के समय जाति प्रमाण-पत्र और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र दिया था। इसी आधार पर उसे बीए अर्थशास्त्र में दाखिल मिल गया। कालेज प्रशासन को अक्षत द्वारा दिए गए कागजातों पर संदेह हुआ। अक्षत ने जो दिव्यांगता व जाति प्रमाण-पत्र दिए थे, वह नागरिक अस्पताल जींद से सत्यापित हुए थे। रामजस कालेज प्रशासन ने इन दस्तावेजों की वेरिफिकेशन के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया। इन पर डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डा. राजेश भोला के हस्ताक्षर व मोहर थी। जब यह कागजात वेरिफकेशन के लिए डा. राजेश भोला के पास आए तो वह उनके फर्जी हस्ताक्षर देखकर दंग रह गए।

एफआइआर दर्ज करवाने की अनुशंसा (Jind Civil Hospital)
डा. राजेश भोला ने सिविल सर्जन को लिखे पत्र में कहा कि जो दस्तावेज उनको जांच के लिए दिए गए थे, वह फर्जी हैं। डा. भोला ने कहा कि किसी भी प्रकार का जाति प्रमाण-पत्र कभी भी स्वास्थ्य विभाग जारी नहीं करता। इसके अलावा जो दिव्यांगता प्रमाण-पत्र है, उस पर उनके जो हस्ताक्षर किए गए हैं, वह फर्जी हैं। इसके अलावा उनकी मुहर भी फर्जी है। ऐसे में उन्होंने इस प्रकार का प्रमाण-पत्र बनवाने वाले और इसके बनाने वाले दोनों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाने की अनुशंसा की है।
फाइल क्रमांक अस्पताल के, हस्ताक्षर फर्जी (Jind Civil Hospital)
जो दिव्यांगता प्रमाण-पत्र मिला है, उसको देखकर साफ लगता है कि नागरिक अस्पताल में दलालों का जमावड़ा लगा हुआ है। इसमें अस्पताल के कर्मचारी भी शामिल होने का अंदेशा है। इस दिव्यांगता प्रमाण-पत्र पर जो पत्र क्रमांक व फाइल नंबर लिखा है, वह नागरिक अस्पताल के रिकार्ड में मैच हो रहा है। अस्पताल में इस प्रकार के प्रमाण-पत्रों के लिए कोई भी व्यक्ति आवेदन करता है तो उस फाइल नंबर व कुछ क्रमांक लगाया जाता है। इस क्रमांक नंबर के आधार पर ही उसका रिकार्ड रखा जाता है। इससे मामला साफ है कि अस्पताल का कर्मचारी ही इस प्रकार का पत्र क्रमांक व फाइल नंबर लगा सकता है। बाहरी व्यक्ति को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती।
44 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र (Jind Civil Hospital)
अक्षत को नागरिक अस्पताल प्रशासन द्वारा जो दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किया गया है, वह 14 मार्च 2019 को जारी किया गया है। इसमें अक्षत को 44 प्रतिशत दिव्यांग बताया गया है। चिकित्सकों ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसके अनुसार अक्षत सुनने में असमर्थ है। जिस समय यह प्रमाण-पत्र जारी किया गया था, अक्षत 14 वर्ष का था।

