Republic day special : प्राकृतिक खेती से बनाई पहचान, अब दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि

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Republic day special : (जींद) भारत सरकार की तरफ से दिल्ली में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में जिले के जिन पांच किसानों को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। वे पिछले काफी समय से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। अहिरका गांव के डा. सुभाष चंद्र, जो हमेटी में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक भी हैं। उन्होंने साल 2018 से प्राकृतिक खेती करनी शुरू की थी। खुद की चार एकड़ जमीन है।

गाय के गोमूत्र व गोबर से घनजीवामृत तैयार करके खेत में प्रयोग करते हैं। खेती में कीटों से रोकथाम के लिए नीम की पत्ती व निंबोली, धतूरा, आक व बकैन के पत्तों का घोल तैयार करके छिड़काव करते हैं। खेत में मधुमक्खी पालन भी करते हैं। खेत में अमरूद, नींबू, करौंदा, जामुन, पपीता के पौधे लगाए हुए हैं। मसालों में हल्दी, लहसून, धनिया, औषधीय में एलोवेरा व तुलसी के साथ- साथ दालों की खेती करती हैं।

अपने खेत में तैयार उत्पाद को सीधे मंडी में बेचने की बजाय पहले प्रोसेसिंग करते हैं। सरसों का तेल, शहद, हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, बासमती चावल की पैकिंग करके बिक्री करते हैं। इससे मार्केट में उचित रेट मिलते हैं। किसानों को अपने खेत में बुलाकर प्राकृतिक खेती के बारे में बताते हैं। प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का काम डा. सुभाष चंद्र की पत्नी सुमित्रा रानी संभालती हैं। डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति एकड़ सालाना बचत हो जाती है।

Republic day special : किसान ईश्वर फसल अवशेष को मल्चिंग व खाद के रूप में करते हैं प्रयोग

ठाठरथ गांव के किसान ईश्वर अत्री गेहूं, आलू, बासमती धान की खेती करते हैं। नींबू के पौधे लगाए हुए हैं। किसी तरह के रसायन व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते। प्राकृतिक खाद खुद तैयार करते हैं। फसल अवशेष को जलाने की बजाय खेत में ही मल्चिंग व खाद बनाने में प्रयोग करते हैं। जिससे जमीन का पीएच मान सही रहता है और उत्पादन भी अच्छा रहता है। प्राकृतिक रूप से तैयार किए उत्पाद अच्छे रेट पर हाथों- हाथ बिक जाते हैं।

Republic day special : गन्ने से गुड़, शक्कर, देसी खांड तैयार कर बेचते हैं किसान बलिंद्र

रिटौली गांव के किसान बलिंद्र मुख्य तौर पर गन्ने की खेती करते हैं। प्राकृतिक खाद का प्रयोग करते हैं। गन्ने को शुगर मिल में ले जाने की बजाय खुद ही गुड़, शक्कर, देसी खांड व राब तैयार करके मार्केट में बेचते हैं। साथ ही बासमती धान की भी प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं। वे दो देसी गाय रखते हैं। उनके मल व मूत्र से खाद तैयार करके खेेत में प्रयोग करते हैं। रसायन व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते, जिससे कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाते हैं।

Republic day special : मोटे अनाज की खेती कर रहे किसान मनजीत

खरकरामजी गांव के किसान मनजीत के पास करीब चार एकड़ जमीन है। वे मोटे अनाज की खेती करते हैं। इनमें रागी, कांगनी, बाजरा मुख्य तौर पर शामिल हैं। इन्हें पौष्टिक अन्न माना जाता है और पानी की लागत भी कम है। प्राकृतिक तरीके से खेती करने से लागत भी कम आती है। उनके उत्पाद बीज के रूप में ही अच्छे रेट में बिक जाते हैं। कुछ हिस्से में गेहूं की भी खेती करते हैं। जिसमें किसी तरह के कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते।

Republic day special : राजबीर शाहू ने किसानों का समूह बना करवाया पंजीकरण

गांव बीबीपुर के राजबीर शाहू के पास पांच एकड़ जमीन है। जिसमें गेहूं, धान व गन्ने की प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं। उन्होंने गांव के पांच किसानों का समूह बनाकर राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र गाजियाबाद से पंजीकरण करवाया हुआ है। ये किसान अपने उत्पाद की पैकिंग करके बेचते हैं। उनके जहर मुक्त उत्पाद मार्केट रेट से ज्यादा में बिकते हैं। जिससे उनकी आमदनी बढ़ी और लागत घटी है।

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