Hydrogen Train India: भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रैन चलने के लिए जींद से सोनीपत रूट पर लगातार परीक्षण किये जा रहे है जिसके चलते ट्रैन को जल्द चलने के प्रयास किये जा रहे है लेकिन बिच बिच में कई रुकावटें ट्रैन के परीक्षण समय में बदलाव कर रही है जिसके चलते हाइड्रोजन ट्रैन चलने का समय लेट होता जा रहा है,जिसके चलते अब फिर दोबरा हाइड्रोजन प्लांट में तकनीकी खराबी आने के कारण इस ट्रेन का बहुप्रतीक्षित ट्रायल शेड्यूल लेट हो गया है।
जानकारी के मुताबिक प्लांट में इलेक्ट्रोफायर एक बार फिर से खराब हो गया है जिसके चलते अब गैस उत्पादन का कार्य बंद हो गया है। Hydrogen Train India
रेलवे के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में आई यह बाधा न केवल तकनीकी टीम के लिए सिरदर्द बनी है, बल्कि पर्यावरण अनुकूल सफर का इंतजार कर रहे यात्रियों की उम्मीदों को भी थोड़ा और लंबा कर दिया है।
इलेक्ट्रोफायर ने बढ़ाई मुश्किलें गैस उत्पादन हुआ शून्य Hydrogen Train India

जैसे की पहले भी बताया गया है कि हाइड्रोजन गैस तैयार करने की जटिल प्रक्रिया में इलेक्ट्रोफायर की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी होती है। इसके जरिए ही पानी से हाइड्रोजन को अलग किया जाता है, जो ट्रेन के ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है। जानकारी के मुताबिक इस मशीन में आई खराबी के चलते प्लांट में एक बूंद भी गैस नहीं बन पा रही है।
जब तक ईंधन उपलब्ध नहीं होगा, तब तक ट्रेन चलना मुमकिन नहीं है। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, लेकिन प्लांट को दोबारा पूरी क्षमता के साथ शुरू करने में अभी कुछ और दिन लग सकते हैं।
फिलहाल दिल्ली में है हाइड्रोजन एक्सप्रेस Hydrogen Train India
एक तरफ जींद का प्लांट बंद है, तो दूसरी तरफ ट्रायल के लिए तैयार की गई हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल दिल्ली में खड़ी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन में कुछ जरूरी मेंटेनेंस और तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। योजना यह है कि जैसे ही कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी के दौरे की तारीख तय होगी, ट्रेन को वापस जींद लाया जाएगा।
देरी का कारण Hydrogen Train India
जानकारों के मुताबिक यह भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, इसलिए शुरुआती स्तर पर ऐसी तकनीकी चुनौतियां आना स्वाभाविक है। हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर रेलवे बेहद सतर्कता बरत रहा है और किसी भी सुरक्षा मानक से समझौता नहीं करना चाहता।
हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए लीकेज और दबाव को लेकर कड़े परीक्षण किए जा रहे हैं। इसी के चलते पहले यह ट्रायल इसी महीने होना था, लेकिन अब प्लांट की खराबी की वजह से इसमें कम से कम 15 से 20 दिनों की देरी हो सकती है। तकनीकी टीम अब बैकअप सिस्टम पर भी विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी खराबी से पूरा प्रोजेक्ट प्रभावित न हो।

