Jind Education : शिक्षा विभाग के आदेशों को दरकिनार कर जिले के अधिकतर निजी स्कूल एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगवा रहे हैं, जो महंगी हैं। स्कूल संचालकों की यह मनमानी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। एक बार पढ़ने के बाद दोबारा कोई विद्यार्थी पुस्तकों का प्रयोग नहीं कर सके, इसके लिए हर वर्ष किताबों में बदलाव किया जा रहा है। नए सत्र की शुरुआत पर जिले में निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के नाम पर कमीशन का खेल शुरू हो गया है।
प्रकाशकों की किताबों के रेट में तीन से चार गुणा का अंतर
(Jind Education)
एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबों के रेट में तीन से चार गुणा का अंतर है। एनसीईआरटी की 60 रुपये वाली किताब की जगह निजी प्रकाशक की 250 से 300 रुपये प्रिंट रेट किताबें बेची जा रही हैं। जिले में 396 प्राइवेट स्कूल हैं। एनसीईआरटी की किताबें का पहली से लेकर पांचवीं तक पूरे सेट 400 से 550 रुपये के बीच हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें 1500 से लेकर 2000 रुपये तक बेची जा रही हैं। वहीं छठी से लेकर आठवीं तक एनसीईआरटी की किताबों के दाम 800 से 900 रुपये हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के दाम लगभग 3500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। नौवीं, दसवीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी का सेट लगभग 1100 से 1300 रुपये का है, जबकि निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के 5500 रुपये से ज्यादा लिए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि मार्केट में एनसीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध नहीं, इसके बावजूद अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

महंगी किताबों से कर रहे है मोटी कमाई (Jind Education)
जींद सेक्टर नौ निवासी अशोक सांगवान ने बताया कि, एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें लगवा कर मुनाफे का मोटा खेल खेला जाता है। निजी प्रकाशकों की किताब एनसीईआरटी के मुकाबले तीन से चार गुना महंगी होती है। हर साल नई किताबें लगवाई जाती हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। एनसीईआरटी की किताबें जो एक हजार रुपये तक आ जाती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें तीन से चार हजार रुपये में मिलती हैं।
विद्यार्थियों पर अतिरिक्त किताबों का बोझ (Jind Education)
सेक्टर आठ निवासी अर्जुन ढिल्लों, ने बताया कि छोटी कक्षाओं में विद्यार्थियों पर अतिरिक्त किताबों का बोझ डाल दिया जाता है। प्राइमरी कक्षाओं में जहां चार से पांच मुख्य विषय होते हैं, वहीं स्कूल संचालक जीके, पर्यावरण विज्ञान, नैतिक विज्ञान, कंप्यूटर साइंस जैसे विषयों को जोड़ देते हैं, जो अतिरिक्त विषय बन जाते हैं। इस प्रकार पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों के सात से आठ विषय हो जाते हैं। अतिरिक्त किताबें लगवाकर निजी स्कूल संचालक मुनाफा कमाते हैं।
निजी प्रकाशकों की किताब लगवाने वालों पर निगरानी रखे विभाग : भनवाला (Jind Education)
पूर्व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुभाष वर्मा ने कहा है कि प्राइवेट स्कूल निजी प्रकाशक की किताब लगवाते हैं, जबकि विभाग की ओर से केवल एनसीईआरटी की किताब लगवाने की अनुमति होती है। ऐसे में शिक्षा विभाग को निजी प्रकाशक की किताब लगवाने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। निजी प्रकाशक की किताबें एनसीईआरटी की अपेक्षा महंगे दामों पर मिलती हैं, जिससे अभिभावकों पर बोझ बढ़ता है।
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई (Jind Education)
जिला शिक्षा अधिकारी रितु पंघाल ने कहा है कि सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लगवाने के लिए विभाग की ओर से निर्देश दिए जाते हैं। अगर निजी स्कूल संचालक निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाते हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगवाने की शिकायत नहीं मिली है।

