New Labour Code: देश में श्रम सुधारों को सही करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है जिसके चलते नए लेबर कोड से कर्मचारियों को काफी राहत मिली है। जिसके चलते 2026 के इस नए नियम में काम करने के घंटों से लेकर सैलरी तक के स्ट्रक्टर को प्रभावित किया है। इसके साथ ही ग्रेच्युटी के मामले में भी काफी जबरदस्त बदलाव किया है। जिसके चलते अब वेतन की नई परिभाषा और गणना के तरीकों में बदलाव आ गया है। जिसके चलते कर्मचारियों की ग्रेच्युटी राशि में 50 फीसदी तक का तगड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
वेतन की नई परिभाषा अब भत्तों का खेल होगा खत्म New Labour Code

नए लेबर कोड के तहत सबसे क्रांतिकारी बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है। अब तक ज्यादातर कंपनियां लागत बचाने के लिए कर्मचारी की बेसिक सैलरी को कम रखती थीं और भत्तों का हिस्सा 70 से 80 फीसदी तक बढ़ा देती थीं। चूंकि ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर कम पैसा मिलता था।New Labour Code
50% का नियम अब नए नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी का कुल वेतन में भत्तों का हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। जिसका सीधा असर यदि भत्ते 50 फीसदी से ज्यादा होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा। इससे ग्रेच्युटी का आधार बढ़ जाएगा और मिलने वाली राशि में भारी बढ़ोतरी होगी।
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों की हुई चांदी
अब तक ग्रेच्युटी के हकदार वही कर्मचारी होते थे जो किसी संस्थान में लगातार 5 साल की सेवा पूरी करते थे। नियमित कर्मचारियों के लिए यह नियम अब भी बरकरार है, लेकिन फिक्स्ड टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों के लिए सरकार ने दिल खोलकर फैसले लिए हैं। New Labour Code
एक साल की सेवा पर ही लाभ New Labour Code
अब कॉन्ट्रैक्ट या प्रोजेक्ट आधारित काम करने वाले युवाओं को 5 साल के लंबे इंतजार की जरूरत नहीं है। यदि उन्होंने एक साल की सेवा भी पूरी की है, तो वे अपने कार्यकाल के अनुपात में ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे। जिसके चलते आईटी सेक्टर, कंस्ट्रक्शन और फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स से जुड़े लाखों युवाओं के लिए यह फैसला सामाजिक सुरक्षा की गारंटी जैसा है।
क्या है ग्रेच्युटी और क्यों है यह जरूरी
ग्रेच्युटी वह राशि है जो एक कर्मचारी को लंबी और वफादार सेवा के बदले इनाम के रूप में देता है। यह सेवानिवृत्ति, इस्तीफा देने या दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु/विकलांगता की स्थिति में कर्मचारी या उसके परिवार को प्रदान की जाती है। 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माने जाने वाले ये नियम कर्मचारियों की रिटायरमेंट लाइफ को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने वाले हैं।
हालांकि, कॉर्पोरेट जगत के लिए यह बदलाव थोड़ी चुनौती पेश कर सकता है क्योंकि इससे कंपनियों की रिटायरमेंट लायबिलिटी बढ़ेगी। लेकिन पारदर्शिता और निष्पक्ष वेतन के नजरिए से यह भारतीय श्रम इतिहास का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

